इतिहास (प्राचीन) नोट्स/ सामान्य अध्ययन

नंद वंश ( Nand dynasty )

नंद वंश ( Nand dynasty )

नंद वंश की स्थापना महापद्मनंद 344 ई पू से 323 ई पू) ने की। पुराणों के अनुसार वह एक शुद्र शासक था। वह नंद वंश का सर्वाधिक शक्तिशाली शासक था। शिशुनाग वंश का अंत करने वाला एवं 344 ई.पू. में नंद वंश की स्थापना।

महाबोधि वंश में पद्मानंद को महापद्मनंद को का नाम उग्रसेन मिलता है। पुराणों में महापद्मनंद को सर्वक्षात्रान्त्रक ( क्षत्रियों का नाश करने वाला ) तथा भार्गव (दूसरे परशुराम का अवतार) कहा गया है। भारतीय(पुराण,जैन ग्रंथ, महावंश टिका आदि) व विदेशी विवरणों में नंदो को नाई या निम्न कुल का बताया गया है।

उसने एकराट में एकछत्रक की उपाधि धारण की। खारवेल के हाथीगुंफा अभिलेख से पता चलता है कि इस नंद राजा ने कलिंग को जीता वह कलिंग से जिनसेन की प्रतिमा उठाकर ले गया तथा कलिंग में एक नहर का निर्माण भी करवाया। महापद्मनंद के पुत्रों में घनानंद सिकंदर का समकालीन था।

महा पदम् नंद की विजय:-

  •  उसे इक्वाकु(कौशल के शासक।इसकी पुष्टि सोमदेव कृत:-कथासरित्सागर से होती है।),
  •  पांचाल(वर्तमान रुहेलखंड-बरेली,बदायू एवं फरुखाबाद),
  •  हैहय(इसकी राजधानी-महिष्मति थी।),
  •   कलिंग(वर्तमान ओडिशा प्रान्त),
  •  अश्मक(आंध्रप्रदेश के निजामाबाद के समीप नवनंददेरा स्थल),
  •  कुरु(मेरठ,दिल्ली तथा थानेश्वर का भू-भाग-राजधानी-इंद्रप्रस्थ),
  •  मैथिली-(नेपाल की सीमा पर स्थित वर्तमान जनकपुर।)
  •  काशेय-मगध का एक प्रान्त।
  •  दितीहोत्रे:-नर्मदा का तटवर्ती क्षेत्र।
  •  एवं शूरसेन(आधुनिक ब्रजमंडल) आदि जनपदों को विजित करने वाला बताया गया है।

धननंद:-

अंतिम एवं सर्वाधिक प्रसिद्ध नन्द शासक जो सिकन्दर महान का समकालीन था। यूनानी लेखकों ने इसे “अग्रभोज” कहा है। इसी के शासनकाल में सिकन्दर ने भारत पर आक्रमण किया था। नंद वंश के अंतिम शासक धननन्द से उसकी प्रजा अत्यधिक घृणा करती थी।

उसने विद्धान ब्राह्मण विष्णुगुप्त(चाणक्य) का अपमान किया था। सिकन्दर के जाने के बाद मगध साम्राज्य में अशांति व अव्यवस्था फैल गई थी। परिणामस्वरूप चंद्रगुप्त मौर्य ने चाणक्य की सहायता से मगध पर अधिकार कर लिया व मौर्य साम्राज्य की स्थापना की।

नन्द वंश के 9 राजा हुए थे अतः इसे “नवनंद” कहा जाता है। इनका साम्राज्य विंध्याचल पर्वतमाला के दक्षिण तक फैला था। महापदम् नंद विंध्यपर्वत के दक्षिण में मगध साम्राज्य का विस्तार करने वाला प्रथम शासक था।

  • भद्रसाल:- महापदम् नन्द का सेनापति।
  • अग्रमीज:- धन नंद का यूनानी नाम।
  • साइबेरिया:- नन्द यहाँ से स्वर्ण मंगाते थे।
  • पाणिनी:- महापदम् नन्द के मित्र थे।इन्होंने पाटली पुत्र में शिक्षा ग्रहण की।
  • वर्ष, उपवर्ष, वररुचि, कात्यायन:- नंद काल के विद्वान।

नंद शासक जैन मत पोषक थे।

  • सिकंदर के आक्रमण के समय मगध का शासक था– धनानन्द
  • उत्तरी भारत का प्रथम ऐतिहासिक सम्राट कौन था –धनानंद. 
  • किसे उग्रसेन अर्थात भयानक सेना का स्वामी कहा जाता था-  महापद्मनंद. 
  • यूनानी लेखको ने धनानंद को क्या कहा है- अग्रगीज व जेंटर मिज.
  • महापद्म नंद ने उड़ीसा पर आक्रमण करके किसकी मूर्ति को वहाँ से उठा लाया- महावीर स्वामी
  • सर्वक्षत्रान्तक किस कहाँ गया है – महापद्मनन्द को.
  • महापद्मनंद- सूद्र शासक था।
  • घनानंद के – 8 भाई थे।

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