भारत नेपाल सम्बन्ध | India Nepal Relations | Page 2 of 2 | Exam Topper Class
इतिहास

भारत नेपाल सम्बन्ध | India Nepal Relations

नये समीकरणों का युग, (1963-71)

भारत-चीन युद्ध के दौरान नेपाल के रवैये को देखकर भारत ने इस ओर अधिक संवेदनशीलता दिखाना शुरू कर दिया। इस कार्यकाल में भारत के सभी प्रमुख राजनेताओं ने नेपाल का दौरा कर दोनों के मध्य उपजी गलतफहमियों को दूर करने के प्रयास किए। अब नेपाल की उदारता से सहायता करते हुए वहां के ढ़ाचागत विकास पर जोर दिया। उदाहरण के रूप में 1964 में भारत ने 9 करोड़ की लागत से सुगौली ओश्वरा सड़क निर्माण किया, काठमांडू-रक्सौल सड़क निर्माण को मंजूरी दी, तथा कोसी योजना को अपने खर्चे पर पूर्ण किया। इसके अतिरिक्त अब भारत ने दोनों के मध्य मतभेद वाले मुद्दों को भी ज्यादा तूल नहीें दी।

दूसरी ओर नेपाल के व्यवहार में भी बदलाव आया तथा पूर्णतय: चीन का पक्षधर नहीं रहा। परन्तु कुछ मुद्दों पर विवादास्पद स्थिति अवश्य बनी रही। प्रथम, नेपाल-चीन सैन्य चौकियों से भारतीय तकनीकी समूह के सैनिकों को वापस बुलाने हेतु कहना। द्वितीय, भारत-नेपाल मैत्री संधि (1950) पर आपत्तियाँ उठाई गईं अन्तत: 1970 से ही व्यापार एवं पारगमन संधि के बारे में विवाद पनपा। परन्तु इन सबके बावजूद नेपाल की भू-राजनैतिक एवं सामरिक स्थिति देखते हुए भारत ने इन विषयों पर नरम रूख अपनाते हुए नेपाल से संबंध बनाये रखने व सुधारने के प्रयास किए। नेपाल की भी बाध्यता यह थी कि वह भी पूर्णरूप से चीन की ओर नहीं जा सकता था। अत: दोनों के मध्य अनुकूल संबंध बने रहे। 4ण् मतभेदों के बावजूद सामान्य संबंध, (1972-79)-यह युग दक्षिण एशिया में दो महत्वपूर्ण परिवर्तनों के साथ शुरू हुआ। 1971 में भारत-सोवियत मैत्री एवं भारत-पाक युद्ध में भारत की विजय ने इसे एक मजबूत क्षेत्रीय शक्ति बना दिया। दूसरी ओर 1972 में महाराजा महेन्द्र के स्थान पर उसके बेटे वीरेन्द्र ने राजगद्दी सम्भाली जो उदार एवं प्रजातांत्रिक प्रवृति के राजा थे। इसके परिणामस्वरूप दोनों के बीच मधुर संबंधों का विकास अनिवार्य हो गया।

इसी बीच 1975 में सिक्किम को भारत में मिलाने तथा नेपाल को तेल व पेट्रोल का कोटा न देने से दोनों के बीच तनाव का माहौल बन गया था। परन्तु जनता दल के शासन के दौर (1977-79) में पुन: मधुर संबंध बने क्योंकि उनकी विदेश नीति के अन्तर्गत पड़ोसियों से मित्रता पूर्वक संबंधों के विकास को प्राथमिकता दी गई थी। परन्तु इस समय का महत्वपूर्ण मतभेद नेपाल को ‘शांति क्षेत्र‘ घोषित करने को लेकर रहा है। जहां नेपाल का तर्क था कि भू-बद्ध राज्य होने के कारण उसके आर्थिक विकास हेतु अनिवार्य है, वहीं भारत इस अवधारणा को संकीर्णता के आधार पर मना करता आया है। अत: इस युग में जहां ‘शांति क्षेत्र‘ की घोषणा व सिक्किम के भारत में विलय को लेकर मतभेद रहें, वहीं पर आर्थिक एवं व्यापारिक क्षेत्रों में संबंध सामान्य बने रहे।

उतार-चढ़ाव परन्तु सुखद संबंध, (1980-2003)

1980 के दशक के घटनाक्रम से दोनों देशों के बीच सुखद संबंधों होने का आभास हुआ। सर्वप्रथम, 1979 में सोवियत संघ के अफगानिस्तान में सैन्य हस्ताक्षेप को लेकर दोनों देशों के बीच आम सहमति रही कि इस मसले को राजनयिक व राजनैतिक तरीके से हल करना चाहिए था। द्वितीय, दोनों देशों ने 1978 की व्यापारिक एवं पारगमन की संधि को 1983 में पुन: 5 वर्षों हेतु मंजूरी प्रदान कर आर्थिक संबंधों को और सुदृढ़ बनाया। तृतीय, इन्हीं सुधरते संबंधों के परिचायक के रूप में भारत से राष्ट्रपति नीलम संजीवा रेड्डी (1981), विदेश मंत्री नरसिम्हाराव (1992) व राष्ट्रपति ज्ञानी जैल सिंह (1986) ने नेपाल की तथा नेपाल से महाराजा वीरेन्द्र (1980 व 1985) व प्रधानमंत्री सूर्य बहादुर थापा (1983) ने भारत की यात्राएँ की।

परन्तु 1980 के दशक के अन्त तक आते-आते ‘शान्ति क्षेत्र‘ पर असहमति के साथ-साथ नेपाल द्वारा हथियारों के आयात, परमिट व्यवस्था लागू करना, नागरिकता की समस्या, व्यापार व पारगमन संधि पर विवाद आदि विषयों पर भी दोनों देशों के मध्य मतभेद बने हुए है। 1989 में भारत द्वारा दोनों के मध्य व्यापार व पारगमन की संधि को भारत द्वारा पुन: न लागू करने से बड़ा संकट खड़ा हो गया था। नेपाल की अर्थव्यवस्था चरमराने के साथ-साथ जनजीवन पर भी गहन प्रभाव पड़ा। लेकिन 1990 में संयुक्त मोर्चा की सरकार के आने से स्थिति सुखद बन गई। भारत ने 1991 में एक की बजाय दो संधियों पर हस्ताक्षर किए जिनके अन्तर्गत व्यापार एवं पारगमन ने अलग-2 दस्तावेजों पर हस्ताक्षर किए गए। बाद में प्रधानमंत्री कोईराला (1991) व नरसिम्हाराव (1992) ने एक दूसरे के देशों में यात्रा कर संबंधों को मजबूती प्रदान की। 1994 में नेपाल में साम्यवादी दल की सरकार आने के बाद संबंधों में शंका उठी, लेकिन वह भी निरर्थक सिद्ध हुई। 1997 में ‘गुजराल सिद्धान्त’ की स्थापना से दोनों देशों में और सौहाई बढ़ा। इसी काल में महाकाली परियोजना, पंचेश्वर परियोजना, टनकपुर बिजली घर व टनकपुर तथा शारदा बैरेज के निर्माण पर सहमति व्यक्त की गई। इसके अतिरिक्त, नई हवाई सेवाओं, व्यापार, संचार, पर्यटन आदि के संदर्भ में भी समझौते एवं सहमतियां प्रकट की गई। नेपाल को पूर्व प्रदत्त राधिकापुर के अतिरिक्त फुलवारी होकर बांग्लादेश के माध्यम से एक और व्यापारिक मार्ग की सुविधाएँ प्रदान की गई।

इन सभी का यह अर्थ नहीं था कि अब कोई मतभेद नहीं रहे। सबसे महत्वपूर्ण मतभेद नेपाल में उग्रवादियों को शरण देने के बारे में चिन्ता का है। भारत का मानना है कि पाकिस्तान की गुप्तचर एजेंसीं आई.एस.आई की भारत विरोधी गतिविधियाँ भी नेपाल में सक्रिय हैं। दिसम्बर 1999 के आई.सी.-814 यात्री विमान का काठमांडू से कंधार ले जाना इसका सबसे बड़ा प्रमाण है। द्वितीय 1991 की व्यापार संधि के दुरूपयोग से भी भारत को चिंता बनी हुई है। इसके प्रावधान का दुरूपयोग कर नेपाल के व्यापारी तीसरे देश से माल मंगा कर भारत की मंडियों में कर-मुक्त होने के कारण आसानी से भेज देते हैं। विदेश मंत्री जसवन्त सिंह की नेपाल यात्रा के दौरान अगस्त 2001 में नेपाल चाहता था कि यह संधि स्वत: अगले पांच साल जारी रहे। तृतीय, 2001 के प्रारम्भ में सम्पूर्ण राजवंश की नृशंस हत्या के बाद आन्तरिक स्थिति, विशेषकर माओवादियों की गतिविधियों, से भारत की चिंताएं बढ़ गई हैं। लेकिन इन मतभेदों के बावजूद भी दोनों देशों के मध्य वर्तमान में कोई रूकावट वाला अवरोधक नहीं है। अत: आशा है कि द्विपक्षीय आधार पर दोनों के रिश्तों में सुधार जारी रहेगा। क्षेत्रीय आधार पर भी जनवरी 2002 में हुई दक्षेस की बैठक में आतंकवाद के मुद्दे पर आम सहमति बनी जिससे इनके बीच एक बड़ी रूकावट समाप्त हो जायेगी। विश्व स्तर पर आये बदलाव व वर्तमान सरकार की नीतियां भी पड़ोसियों से मधुर संबंधों में विश्वास रखती है। बाकी आने वाला समय निर्धारित करेगा। लेकिन तत्थों के आधार पर भविष्य में दोनों देशों के बीच मधुर संबंधों की आशा की जा सकती है।

About the author

J.S.Rana Sir

My Name is Jitendra Singh (Rana) और मैं एक सफल शिक्षक बनने की तैयारी कर रहा हूं ! और मैं लखनऊ, उत्तर प्रदेश (भारत) से हूँ।
मेरा उद्देश्य हिन्दी माध्यम में प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले प्रतिभागियों का सहयोग करना है ! आप सभी लोगों का स्नेह प्राप्त करना तथा अपने अर्जित अनुभवों तथा ज्ञान को वितरित करके आप लोगों की सेवा करना ही मेरी उत्कृष्ट अभिलाषा है !!
दोस्तो अगर आपको यह पोस्ट/विडियो/क्लास अच्छी लगी हो तो इसे Share अवश्य करें ! कृपया कमेंट के माध्यम से बताऐं कि ये पोस्ट आपको कैसी लगी आपके सुझावों का भी स्वागत रहेगा Thanks !

Leave a Comment