भौतिक विज्ञान नोट्स

प्रकाश Light

प्रकाश की प्रकृति एवं चाल

प्रकाश

हमारी दृष्टि की अनुभूति जिस बाह्य भौतिक कारण के द्वारा होती है, उसे हम प्रकाश कहते हैं। अतः प्रकाश एक प्रकार का साधन है, जिसके सहारे आँख वाले लोग किसी वस्तु को देखते हैं। जब किसी वस्तु पर प्रकाश पड़ता है, तब उस वस्तु से प्रकाश टकराकर देखने वाले की आँख पर पड़ता है, जिससे व्यक्ति उस वस्तु को देख पाता है। वास्तव में प्रकाश एक प्रकार की ऊर्जा है, जो विद्युत-चुम्बकीय तरंगों के रूप में संचरित होती है।

प्रकाश की दोहरी प्रकृति-तरंग व कण Dual Nature of Light-Wave & Particle

आज प्रकाश को कुछ घटनाओं में तरंग और कुछ में कण माना जाता है। कुछ घटनाओं में उसकी तरंग प्रकृति प्रबल होती है (कण प्रकृति दबी रहती है) और कुछ में प्रकाश की कण प्रकृति स्पष्टतः उभरकर जाती है और तरंग प्रकृति दबी रहती है। इसी को प्रकाश की दोहरी प्रकृति कहते हैं।

प्रकाश का विद्युत-चुम्बकीय तरंग सिद्धान्त प्रकाश के केवल कुछ प्रमुख गुणों की ही व्याख्या कर पाता है, जैसे- प्रकाश का परावर्तन, अपवर्तन, सीधी रेखा में चलना, विवर्तन, व्यतिकरण व ध्रुवण। प्रकाश के कुछ गुण ऐसे भी हैं जिनकी व्याख्या तरंग सिद्धान्त नहीं कर पाता है। इनमें प्रमुख है- प्रकाश का विद्युत-प्रभाव तथा कॉम्पटन प्रभाव। इन प्रभावों की व्याख्या आइन्सटीन द्वारा प्रतिपादित प्रकाश के फोटॉन सिद्धान्त द्वारा की जाती है। इस सिद्धान्त के अनुसार, प्रकाश ऊर्जा के छोटे-छोटे बण्डलों या पैकेटों के रूप में चलता है, जिन्हें फोटॉन (photon) कहते हैं। वास्तव में ये दोनों प्रभाव प्रकाश की कण-प्रकृति (particle nature) को प्रकट करते हैं।

प्रकाश की चाल Speed of Light

सर्वप्रथम रोमर नामक वैज्ञानिक ने बृहस्पति ग्रह के उपग्रहों की गति को देखकर प्रकाश का वेग ज्ञात किया था। उसने बृहस्पति ग्रह के एक उपग्रह में लगने वाले दो ग्रहणों के बीच की अवधि को मापकर प्रकाश की चाल ज्ञात किया था।

प्रकाश का वेग सबसे अधिक निर्वात में होता है। निर्वात् में प्रकाश की चाल का सर्वाधिक स्वीकृत निवति मान 1,86,310 मील प्रति सेकण्ड या 2,99,776 किलोमीटर प्रति सेकण्ड या 3 × 108 मीटर प्रति सेकण्ड है। किसी पदार्थ में प्रकाश की चाल निर्वात् से कम होती है। निर्वात की तुलना में हवा में प्रकाश की चाल 0.03 प्रतिशत कम, पानी में 25 प्रतिशत कम तथा काँच में 35% कम होती है।

प्रकाश को सूर्य से पृथ्वी तक आने में औसतन 499 से० (अर्थात् 8 मिनट 19 से०) का समय लगता है। इसी प्रकार चन्द्रमा से परावर्तित प्रकाश को पृथ्वी तक आने में 1.28 से० का समय लगता है ।

विभिन्न माध्यमों में प्रकाश की चाल

माध्यमप्रकाश की चाल (मी./से.)
निर्वात3 × 108
पानी2.25 × 108
तारपीन का तेल2.04 × 108
काँच2 × 108
रॉक साल्ट1.96 × 108
नाइलोन1.96 × 108

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