कंप्यूटर नोट्स/ सामान्य अध्ययन

36 कम्‍प्‍यूटर कोड (Computer Codes)

कंप्यूटर कोड सिस्टम

कम्‍प्‍यूटर कोड (Computer Codes)

कम्‍प्‍यूटर में डाटा अक्षरों (Alphabets), विशेष चिन्‍हों (Special Characters) तथा अंकों (Numeric) में हो सकता हैं। अत: इन्‍हें अल्‍फान्‍युमेरिक डाटा (Alphanumeric Data) कहा जाता हैं। डाटा में प्रत्‍येक अक्षर, चिन्‍ह या अंक को एक विशेष कोड द्वारा व्‍यक्‍त किया जाता हैं।

बाइनरी कोडेड डेसिमल (BCD – Binary Coded Decimal)

इसमें संपूर्ण Decimal Number को Binary  में बदलने की बजाय Decimal Number के प्रत्‍येक अंक को उसके चार अंकीय बाइनरी तुल्‍यांक(Rating)से प्रतिस्‍थापित (Substituted)कर दिया जाता है। इसे 4  Bit BCD Code कहा जाता हैं।

आस्‍की (ASCII – American Standard Code for Information Interchange)

आस्‍की (ASCII) एक‍ लोकप्रिय कोडिंग सिस्‍टम है जिसका प्रारंभ आन्‍सी (ANSI – American National Standards Institute) द्वारा 1963 में किया गया। इसमें एक कैरेक्‍टर के लिए 8 बिट और तीव्र निरूपण के लिए Hexadecimal number System का प्रयोग किया गया। कम्‍प्‍यूटर के की–बोर्ड में प्रयुक्‍त प्रत्‍येक कैरेक्‍टर के लिए एक विशेष आस्‍की कोड निर्धारित किया गया हैं। इसमें एक कैरेक्‍टर के लिए 8 बिट का प्रयोग किया जाता हैं।

यूनीकोड (Unicode-Universal Code)

कम्‍प्‍यूटर के बढ़ते व्‍यवहार तथा अलग-अलग भाषाओं में कम्‍प्‍यूटर के उपयोग ने एक Public code की आवश्‍यकता को जन्‍म दिया जिसमें संसार के प्रत्‍येक कैरेक्‍टर के लिए एक अलग कोड निर्धारित हो ताकि प्रत्‍येक भाषा, प्रत्‍येक प्रोग्राम तथा प्रत्‍येक साफ्टवेयर में उसका प्रयोग किया जा सके। इसके लिए यूनीकोड की व्‍यवस्‍था की गई जिसमें एक लाख कैरेक्‍टर के निरूपण की क्षमता हैं|

यूनीकोड विश्‍व की सभी भाषाओं में प्रयुक्‍त पहले 256 कैरेक्‍टर का निरूपण आस्‍की कोड के समान ही है। इसमें प्रत्‍येक कैरेक्‍टर को 32 बिट में निरूपित किया जाता हैं। यूनीकोड में तीन प्रकार की व्‍यवस्‍था प्रयोग में लायी जाती हैं।

i. यूटीएफ – 8 (UTF-8-Unicode Transformation Format-8

यूटीएफ-8 फार्मेट में समस्‍त यूनीकोड अक्षरों को एक‍, दो, तीन या चार बाइट के कोड में बदला जाता हैं।

ii. यूटीएफ – 16 (UTF-16)

इस फार्मेट में यूनीकोड अक्षरों को एक या दो शब्‍दों (1 शब्‍द = 16 बिट) के कोड में बदला जाता हैं। अत: इसे Word Oriented Format भी कहते हैं।

iii. यूटीएफ-32 (UTF-32)

इस कोड में समस्‍त अक्षरों को दो शब्‍दों (Words) यानी 32 बिट के यूनीकोड में बदला जाता हैं।

नंबर सिस्टम क्या है?

What is Number System (नंबर सिस्टम क्या है?)

किसी भी संख्‍या को निरूपित(Denote) करने के लिए एक विशेष Number System का प्रयोग किया जाता हैं। प्रत्‍येक Number System में प्रयोग किए जाने वाले अंक या अंको के समूह से उसको दर्शाया  जाता हैं। प्रत्‍येक संख्‍या का एक निश्चित आधार (Base) होता हैं। जो उस Number System में प्रयोग किए जाने वाले मूल अंकों (Basic Digits) की संख्‍या के बराबर होता हैं। किसी भी संख्‍या में अंको (Digits) की स्थिति दायीं से बायीं ओर गिनी जाती हैं। किसी संख्‍या में प्रत्‍येक अंक का मान उसके संख्‍यात्‍मक मान (Face Value) तथा स्‍थानीय मान (Position Value) पर निर्भर करता हैं। किसी संख्‍या का कुल मान (Value) प्रत्‍येक अंक के मान का योगफल होता हैं।Decimal number System सर्वाधिक प्राचीन और सबसे प्रचलित संख्‍या पद्धति हैं।

आधार (Base)

किसी संख्‍या को निरूपित (Denote) करने के लिए प्रयोग की जाने वाली मूल अंकों (Basic Digits) की कुल संख्‍या उस Number System का आधार कहलाती हैं। उदाहरण के लिए, Decimal number System में सभी संख्‍याओं को 10 मूल अंकों (0, 1, 2, 3, 4, 5, 6, 7, 8, तथा 9) से निरूपित किया जाता हैं। अत: इसका आधार 10 हैं। Binary Number System  में 2 मूल अंकों (0 तथा 1 ) का प्रयोग किया जाता हैं। अत: इसका आधार 2 हैं। Octal number System में आठ मूल अंकों (0, 1, 2, 3, 4, 5, 6, तथा 7) का प्रयोग होता हैं, अत: इसका आधार 8 हैं। Hexadecimal Number System का आधार 16 है क्‍योंकि इसमें सभी संख्‍याओं को 16 मूल अंकों (0, 1, 2, 3, 4, 5, 6, 7, 8, 9, A, B, C, D तथा E) से दर्शाया जाता हैं।

संख्‍यात्‍मक मान (Numerical value) 

किसी संख्‍या में किसी अंक की Numerical value उस संख्‍या की स्थिति पर निर्भर करती हैं। संख्‍या में अंकों की स्थिति को दायीं से बायीं ओर गिना जाता हैं। सबसे दांयी और अर्थात इकाई के स्‍थान पर स्थित अंक की Numerical value ‘0’ होगी। दहाई के अंक का संख्‍यात्‍मक मान ‘1’ , सैकड़े के अंक का संख्‍यात्‍मक मान ‘2’ जबकि हजार के अंक का संख्‍यात्‍मक मान ‘3’ होता हैं।

स्‍थानीय मान (Position Value) 

किसी संख्‍या में किसी अंक का स्‍थानीय मान संख्‍या के आधार तथा उस‍के संख्‍यात्‍मक मान पर निर्भर करता हैं। किसी संख्‍या का स्‍थानीय मान संख्‍या के आधार पर संख्‍यात्‍मक मान के घात के बराबर होता हैं।
स्‍थानीय मान = (आधार)संख्‍यात्‍मक मान
Position Value = (Base)Face Value
किसी संख्‍या का मान प्रत्‍येक अंक के संख्‍यात्‍मक मान तथा स्‍थानीय मान के गुणनफल का योग होता हैं।

उदाहरण : संख्‍या = 4206(10)

 

चौथा अंक

(हजार)

तीसरा अंक

(सैकड़ा)

 दूसरा अंक

(दहाई)

पहला अंक

(इकाई)

संख्‍या

4

2

0

6

संख्‍यात्‍मक मान (Face Value)

3

2

1

0

स्‍थानीय मान (Position Value)

103=1000

102=100

101=10

100=1

संख्‍या का मान = अंक x स्‍थानीय मान

4×1000=4000

2×100 =200

0x10 = 0

6×1 = 6

संख्‍या का कुल मान = 4000 + 200 +0 +6 = 4206(10)

हमारे बारें में

J.S.Rana Sir

My Name is Jitendra Singh (Rana) और मैं एक सफल शिक्षक बनने की तैयारी कर रहा हूं ! और मैं लखनऊ, उत्तर प्रदेश (भारत) से हूँ।
मेरा उद्देश्य हिन्दी माध्यम में प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले प्रतिभागियों का सहयोग करना है ! आप सभी लोगों का स्नेह प्राप्त करना तथा अपने अर्जित अनुभवों तथा ज्ञान को वितरित करके आप लोगों की सेवा करना ही मेरी उत्कृष्ट अभिलाषा है !!
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