जन्तु विज्ञान नोट्स

रोग एवं चिकित्सा Diseases and Therapies

सामान्य परिचय

वर्तमान समय में भारत जिस प्रकार की स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं से जूझ रहा है, वह अत्यन्त ही कठिन एवं चुनौतीपूर्ण है। आज भी हम कई महामारी फ़ैलाने वाले रोगों, एड्स, कैंसर, हेपेटाइटिस जैसी खतरनाक बीमारियों से निजात पाने के लिए संघर्षरत् हैं। इस संदर्भ में भारत में बड़े पैमाने पर चातुर्दिक फैली गरीबी, कुपोषणता, अशिक्षा एवं नजरअंदाजी, आग में घी का काम कर रही है। ये ऋणात्मक शक्तियाँ, जनसंख्या की तीव्र वृद्धि के कारण दिन-प्रतिदिन तीव्र से तीव्रतर होती जा रही हैं।

स्वास्थ्य के क्षेत्र में भारत में हुई प्रगति का आकलन किया जाय तो भले ही भारत ने अपने चरमोत्कर्ष को प्राप्त न किया हो, परन्तु इस क्षेत्र में हमारी सफलताएँ एवं विकास अभूतपूर्व है। स्वतंत्रता प्राप्ति के पहले भारत में स्वास्थ्य सुविधा के विकास का स्तर निम्न था तथा जो सुविधाएँ उपलब्ध थी, उन तक सीमित लोगों की ही पहुँच थी। आजादी के बाद जनस्वास्थ्य के क्षेत्र में भारत ने अनेक उपलब्धियाँ प्राप्त की- भारत के गाँव-गाँव तक प्राथमिक स्वास्थ्य सुविधाओं को प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्रों द्वारा पहुँचाया गया। विभिन्न स्वास्थ्य विषयों पर विश्वस्तरीय शोधकार्य किये गये एवं आज भी यह अबाध गति से जारी है। भारत में नई-नई दवाओं की खोज एवं उनके उत्पादन ने भारत का इस क्षेत्र में विश्व के अग्रणी देशों की सूची में नाम दर्ज करा दिया है।

भारत का स्वास्थ्य-मंत्रालय दिन-रात देश की आधारभूत स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ बनाने में लगा हुआ है, जिससे कि स्वास्थ्य सुविधाओं को देश के कोने-कोने में तथा देश के सर्वाधिक पिछड़े एवं गरीब वर्ग के लोगों तक पहुँचाया जा सके। यह मंत्रालय स्वास्थ्य संबंधी नीतियों को निर्धारित कर उसे कार्यरूप प्रदान करने के लिए कृतसंकल्प है, जिससे कि स्वास्थ्य सब के लिए (Health for all) के राष्ट्रीय लक्ष्य को (जिसे सितम्बर 1978 के आल्माटा के विश्व स्वास्थ्य सम्मेलन में अपनाया गया था) पूरा किया जा सके।

भारतीय संविधान के अनुसार, जन-स्वास्थ्य एवं सफाई, अस्पताल व दवाखाने, राज्य सूची के अन्तर्गत आते हैं; जबकि जनसंख्या, परिवार नियोजन, चिकित्सा, शिक्षा, खाद्य पदार्थों एवं अन्य वस्तुओं में मिलावट, औषधियाँ एवं विष, व्यवसाय, पंजीकरण सहित जन्म-मरण के आंकड़े, पागलपन तथा मानसिक विकृतियाँ आदि समवर्ती सूची में आते हैं। वैसे राज्य के नीति निर्देशक सिद्धान्तों के तहत अनुच्छेद 47 में भी जन स्वास्थ्य में सुधार सम्बन्धी प्रावधानों को शामिल किया गया है। केन्द्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, नागरिकों को स्वस्थ एवं सुखी जीवन जीने के लिए सहायक के तौर पर महत्वपूर्ण योजनाएँ, रोगों की रोकथाम एवं नियंत्रण आदि जैसे राष्ट्रीय महत्व के कार्यक्रम, जो हमारे विकास प्रयासों के मुख्य मुद्दे भी हैं, के कार्यान्वयन का उत्तरदायित्व भी इसी मंत्रालय पर है।

भारत में औषधि की विभिन्न पद्धतियां

आयुर्वेद

शब्द आयुर्वेद का अर्थ है-जीवन का विज्ञान। संभवतया यह सबसे पुराना चिकित्सा विज्ञान रहा है जिसकी सकारात्मक परिणति मानसिक, सामाजिक, नैतिक और अध्यात्मिक कल्याण को मिलाने के द्वारा प्राप्त करने वाला स्वास्थ्य रही है। भारत, स्वास्थ्य देखभाल के तत्कालीन परिदृश्य में आयुर्वेद उपयोगिता की वकालता करने में आगे आया है। इसके प्रयासों से विदेशी देशों ने इस विज्ञान की प्रभावोत्पादकता और महत्व को समझना शुरू किया है। यूएसए, यूके, रूस, जर्मनी, हगरी, विश्व के अन्य भाग से लोग आयुर्वेद विशेषज्ञों द्वारा उपचार कराने के लिए भारत आते हैं।

योग

योग एक विज्ञान तथा शारीरिक, मानसिक, नैतिक और अध्यात्मिक रूप से स्वस्थ रहने की कला भी है। यह किसी भी प्रकार से जाति, आयु, लिंग, धर्म, जाति या आस्था द्वारा सीमित नहीं। अभ्यास उनके द्वारा किया जा सकता है जो बेहतर जीवन के लिए शिक्षा पाना

चाहते हैं। भारत में असंख्य योग केंद्र हैं, जो सुचना देते हैं और यह शिक्षा देते हैं कि कैसे योग और औषधि, किसी के जीवन में खुशियां ला सकते हैं। तथापि, योग शिविर लगभग सभी भारतीय शहरों में आयोजित किए जाते हैं, जो योग और ध्यान उपचार के लिए निम्नलिखित हैं –

  1. ऋषिकेश
  2. हरिद्वार
  3. धर्मशाला
  4. पांडिचेरी में औरोविले
  5. बंगलौर के निकट पुट्टापर्ती
  6. माउंट आबू

भारत में योग का विकास विज्ञान के रूप में किया गया है जो अनेक रोगों को ठीक करने के लिए लाभदायक है ।

नेचुरोपैथी (प्राकृतिक चिकित्सा)

नेचुरोपैथी ठीक-ठाक रखने के विज्ञान की प्रणाली है, जो शरीर में निहित शक्ति को प्रकृति में पांच महान तत्वों की सहायता प्राप्ति के लिए उत्तेजित करती है अर्थात मृदा, जल, वायु, अग्नि और भूमि। नेचुरोपैथी प्रकृति में वापस आने का आह्वान है और पर्यावरण के साथ सामन्जस्य करके जीने का सरल तरीका अपनाना है।

नेचुरोपैथी रोग प्रबंधन का न केवल सरल व्यावहारिक तरीका प्रदान करता है। अपितु एक सुदृढ़ सैद्धांतिक आधार भी प्रदान करता है। यह संपूर्णत्व चिकित्सा देखभाल के लिए प्रयोज्य है और स्वास्थ्य की नींव पर ध्यान देकर; और भावी पीढ़ी के लिए अधिक प्रभावी ढांचा भी प्रदान करता है।

नेचुरोपैथी, पश्चिमी दुनिया में भी जीवन में खुशहली वापस लाने के प्राकृतिक तरीके के कारण लोकप्रिय हो रहा है।

यूनानी

औषध की यूनानी प्रणाली एक प्राचीनतम प्रणाली है । यह अभी भी लोकप्रिय है और भारतीय उपमहाद्वीप एवं विश्व के अन्य भागों में इसका अभ्यास किया जाता है । यूनानी के मूल सिद्धांतों के अनुसार शरीर चार मूल तत्वों से बना है अर्थात पृथ्वी, वायु, जल और अग्नि, और अलग-अलग विशेषता है- ठंड, गर्म, गीला एवं शुष्क ।

सिद्ध

सिद्ध प्रणाली के सिद्धांत और शिक्षा मौलिक और व्यावहारिक, दोनों हैं। यह आयुर्वेद के समान ही है। इसकी विशेषता यह है कि आंतरिक प्रणाली के अनुसार मानव शरीर ब्रम्हांड की प्रतिकृति है।

यह प्रणाली जीवन में उद्धार की परिकल्पना से जुड़ी हुई है। इस प्रणाली के प्रवर्तकों का मानना है कि इस अवस्था को औषधि और मननः चिंतन के द्वारा प्राप्त किया जा सकता है। प्रणाली आकस्मिक मामलों को छोड़ कर सभी प्रकार के रोगों का इलाज करने में, विशेष तौर पर त्वचा संबंधी सभी समस्याओं का उपचार करने में सक्षम हैं, विशेष कर सोरायसिस, यौन संचारित संक्रमण में संक्रमण, यकृत की बीमारी और आंत के रोग, सामान्य डिसएबिलिटी, एनेमिया, डायरिया और विकार के अतिरिक्त सामान्य बुखार ।

होम्योपैथी

आज होम्योपैथी तेजी से बढ़ती प्रणाली बन गई है और लगभग पूरी दुनिया में इसका अभ्यास किया जा रहा है। लगभग 10 प्रतिशत भारतीय जनसंख्या अपने स्वास्थ्य देखभाल की आवश्यकता के लिए केवल होम्योपैथी पर लगभग डेढ़ शताब्दी से भी अधिक समय से निर्भर है जब से भारत में होम्योपैथी का प्रचालन हो रहा है । इसे औषधि की एक राष्ट्रीय प्रणाली के रूप में मान्यता मिल गई है और बड़ी संख्या में स्वास्थ्य देखभाल प्रदान करने में यह महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। इसकी ताकत इसके स्पष्ट प्रभाव में निहित है। चूंकि यह भावनात्मक, अध्यात्मिक और शारीरिक स्तरों पर आंतरिक संतुलन के संवर्धन द्वारा रोगी व्यक्ति के लिए संपूर्णता का तरीका है, इसलिए पूरे विश्व के लोग होम्योपैथी द्वारा रोगों को चंगा करने में भारत की मास्टरी का लोहा मानते हैं ।

हमारे बारें में

एग्जाम टॉपर क्लास टीम

My Name is Jitendra Singh (Rana) और मैं एक सफल शिक्षक बनने की तैयारी कर रहा हूं ! और मैं लखनऊ, उत्तर प्रदेश (भारत) से हूँ।
मेरा उद्देश्य हिन्दी माध्यम में प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले प्रतिभागियों का सहयोग करना है ! आप सभी लोगों का स्नेह प्राप्त करना तथा अपने अर्जित अनुभवों तथा ज्ञान को वितरित करके आप लोगों की सेवा करना ही मेरी उत्कृष्ट अभिलाषा है !!
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