आधुनिक भारत का इतिहास नोट्स

गवर्नर, गवर्नर जनरल तथा वायसराय Governor, Governor General and Viceroy

गवर्नर, गवर्नर जनरल तथा वायसराय

बंगाल के गवर्नर

लार्ड क्लाइव (1757 से 1760 .)

  • लार्ड क्लाइव को भारत मेँ अंग्रेजी शासन का संस्थापक माना जाता है।
  • ईस्ट इंडिया कंपनी ने क्लाइव को 1757 में बंगाल का गवर्नर नियुक्त किया। क्लाइव ईस्ट इंडिया कंपनी द्वारा भारत मेँ नियुक्त होने वाला प्रथम गवर्नर था।
  • भारत मेँ अंग्रेजी शासन की स्थापना मेँ निर्णायक माने जाने वाला 1757 का प्लासी का युद्ध क्लाइव के नेतृत्व में लड़ा गया।
  • बंगाल के गवर्नर के रुप मेँ अपने दूसरे कार्यकाल मेँ बरार के युद्ध के बाद क्लाइव ने मुग़ल सम्राट शाह आलम द्वितीय से इलाहाबाद की संधि की।
  • 1764 मेँ ऐतिहासिक बक्सर युद्ध के समय वन्सिटार्ट (1760 – 1765)  बंगाल का गवर्नर था।
  • इलाहाबाद की संधि के बाद क्लाइव ने बंगाल मेँ द्वैध शासन की नींव रखी।
  • द्वैध शासन के दौरान क्लाइव ने वेरेल्स्ट (1767 – 171769) और कर्टियर (1769 – 1772)  बंगाल के गवर्नर रहे।
  • द्वैध शासन के दौरान कंपनी के अधिकारियो मेँ व्याप्त भ्रष्टाचार को कम करने के लिए क्लाइव ने सोसाइटी ऑफ ट्रेड की स्थापना की।

बंगाल के गवर्नर जनरल

वारेन हैस्टिंग्स(1772 – 1785 ई.)

1772 में कर्टियर के बाद वारेन हेस्टिंग्स को बंगाल का गवर्नर बनाया गया। इसने बंगाल मेँ चल रहै द्वैध शासन को समाप्त कर बंगाल का शासन ब्रिटिश ईस्ट इंडिया के अधीन कर लिया।

1773 के रेग्यूलेटिंग एक्ट के द्वारा वारेन हैस्टिंग्स बंगाल का प्रथम गवर्नर जनरल बनाया गया।

वारेन हेस्टिंग्स ने बंगाल की राजधानी को कोलकाता लाकर भारत मेँ अंग्रेजी साम्राज्य की राजधानी घोषित किया।

वारेन हेस्टिंग्स ने 1776 मेँ कानून संबंधी एक संहिता का निर्माण करवाया जिसे एकोडऑफजेंटू कहा जाता है।

इसके समय में बंगाल के एक समृद्ध ब्राह्मण, नंद कुमार पर भ्रष्टाचार का आरोप लगाकर अभियोग चलाया गया।

प्रथम आंग्ल मराठा युद्ध वारेन हेस्टिंग्स के शासन काल मेँ हुआ था।

इसके समय मेँ द्वितीय आंग्ल मैसूर युद्ध(1780 – 1784) हुआ।

वारेन हैस्टिंग्स के कार्यकाल मेँ पिट्स इंडिया एक्ट पारित हुआ, जिसके द्वारा बोर्डऑफ कंट्रोल की स्थापना हुई।

वारेन हैस्टिंग्स के 1785 ई. मेँ वापस इंग्लैण्ड जाने के बाद मैक्फर्सन फरवरी 1785 से सितंबर 1786 ई. तक बंगाल का गवर्नर रहा।

लार्ड कार्नवालिस (1786 ई. से 1793 ई.)

कार्नवालिस को भारत मेँ एक निर्माता एवं सुधारक के रुप मेँ याद किया जाता है।

कार्नवालिस को सिविल सेवा का जनक कहा जाता है। इसने कलेक्टर के अधिकारोँ को सुनिश्चित किया और उनके वेतन का निर्धारण किया।

कार्नवालिस ने भारत मेँ ब्रिटेन से भी पहले पुलिस व्यवस्था की स्थापना की इसलिए इसे पुलिस व्यवस्था का जनक भी कहा जाता है।

कॉर्नवालिस ने प्रशासनिक व्यवस्था को व्यवस्थित करने के लिए 1793 मेँ एक नियम बनाया जिसे कार्नवालिस कोड के नाम से भी जाना जाता है। इस कोड के अनुसार कार्नवालिस ने कार्यपालिका एवं नयायपालिका की शक्तियोँ का विभाजन किया।

1790 – 1792 ई. में तृतीय आंग्ल मैसूर युद्ध कार्नवालिस के कार्यकाल मेँ हुआ।

1793 मेँ कार्नवालिस ने बंगाल बिहार और उड़ीसा मेँ स्थाई बंदोबस्त लागू किया।

1895 मेँ कॉर्नवालिस की मृत्यु हो गई गाजीपुर मेँ इसका मकबरा बनाया गया है जिसे लाटसाहब का मकबरा कहा जाता है।

सर जॉन शोर (179से 1798 ई.)

  • कार्नवालिस के बाद सर जॉन शोर को बंगाल का गवर्नर जनरल बनाया गया। इसके कार्यकाल मेँ सर्वाधिक महत्वपूर्ण घटना खारदा का युद्ध था, जो 1795 में मराठों व निजाम के बीच।
  • सर जॉन शोर अपनी अहस्तक्षेप की नीति के कारण विख्यात था। इसके कार्यकाल मेँ बंगाल के अंग्रेज अधिकारियोँ के विद्रोह से स्थिति अनियंत्रित हो गई, जिससे 1798 में इसे इंग्लैण्ड वापस बुला लिया गया।

लार्ड वेलेजली (1798 से 1805 .)

  • लार्ड वेलेजली ने शांति की नीति का परित्याग कर केवल युद्ध की नीति का अवलंबन किया।
  • लार्ड वेलेजली ने साम्राज्य विस्तार की नीति को अपनाते हुए भारतीय राज्योँ को शासन ब्रिटिश शासन की परिधि मेँ लाने के लिए सहायक संधि प्रणाली का प्रयोग किया।
  • लार्ड वेलेजली, कंपनी को भारत की सबसे बडी शक्ति बनाना चाहता था, उसके प्रदेशो का विस्तार कर भारत के सभी राज्योँ को कंपनी पर निर्भर होने की स्थिति मेँ लाना चाहता था।
  • सहायक संधि पर हस्ताक्षर करने वाले राज्यों में हैदराबाद तथा फिर मैसूर, तंजौर, अवध, जोधपुर, जयपुर, बूंदी, भरतपुर और पेशावर शामिल थे।
  • वेलेजली के कार्यकाल मेँ चौथा आंग्ल मैसूर युद्ध हुआ। इसने इस युद्ध मेँ टीपू सुल्तान को हराने के पश्चात मैसूर पर अधिकार कर लिया।
  • इसने पेशवा के साथ बेसीन की संधि की तथा 1803 – 1805 के दौरान आंग्ल मराठा युद्ध लड़ा।
  • अपनी विस्तार नीति के तहत पंजाब सिंधु को छोडकर लगभग संपूर्ण भारत को कंपनी के प्रभाव क्षेत्र मेँ ला दिया।
  • लार्ड वेलेजली के कार्यकाल मेँ टीपू सुल्तान ने नेपोलियन से पत्राचार कर भारत से अंग्रेजो को निकालने की योजना बनाई थी।

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