रसायन विज्ञान नोट्स

रसायन विज्ञान के महत्वपूर्ण तथ्य Important Facts Of Chemistry

पीने के जल का कीटाणुनाशन Sterilization of Drinking Water

बड़े शहरोंमें पीने के पानी को नदियों या झीलों से बड़े-बड़े पक्के बने हुए तालाबों में इकट्ठा किया जाता है। पिने योग्य बनाने के लिए उस जल का कीटाणुनाशन किया जाता है। इसके लिए निम्नलिखित विधियां प्रयोग में लायी जाती हैं।

क्लोरीनीकरण Chlorination

क्लोरीन एक कीटाणु नाशक पदार्थ है। जल में कीटाणुओं का नाश करने के लिए द्रव क्लोरीन या विरंजक चूर्ण (Bleaching Powder) की उचित मात्रा प्रयोग में लायी जाती है।

ओजोनीकरण Ozonization

ओजोन भी कीटाणुनाशक है। जल में भी ओज़ोनीय ऑक्सीजन प्रवाहित की जाती है, जिससे कीटाणुओं का नाश हो जाता है\ जल को एक टंकी में ऊपर से डाला जाता है टंकी में कोक के टुकड़े भरे होते हैं। नीचे से ओज़ोनीय ऑक्सीजन प्रवाहित की जाती है। जल की धारा ओज़ोनीय ऑक्सीजन में मिलती है। जिससे जल के कीटाणु नष्ट हो जाते हैं।

अल्ट्रा वायलेट किरणों से By Ultra-violet Rays

अल्ट्रा वायलेट किरणें भी कीटाणु नाश करने का अच्छा साधन हैं। इस किरणों को मरकरी लैम्प (Mercury Lamp) से प्राप्त करके जल की धारा पर प्रवाहित किया जाता है। इससे बहुत ही कम समय में कीटाणुओं का नाश हो जाता है और जल में कोई अनुचित गंध या स्वाद भी उत्पन्न नहीं होता है।

खानों में हानिकारक गैस का पता लगाना

खानों में हानिकारक गैस का पता लगाने वाले उपकरण में दो समान प्रकार की नलिकाएं ली जाती हैं एक नलिका में शुद्ध वायु तथा दूसरी में खाने की वायु प्रवाहित करते हैं। यदि खाने की वायु शुद्ध है तो दोनों नालियों में एक ही आवृत्ति (Frequency) का स्वर निकलेगा तथा कोई विस्पंद (Beat) सुनाई नहीं देगा। यदि खाने की वायु मीथेन गैस की उपस्थिति के कारण अशुद्ध हो जाती है। तो उसका घनत्व कम हो जाने से ध्वनि का वेग बढ़ जायेगा। ध्वनि का वेग बढ़ जाने से उत्पन्न स्वर की आवृत्ति बदल जाएगी तथा विस्पंद सुनाई देने लगेंगे। विस्पंद सुनाई देने से यह निश्चित हो जाता है कि खाने में कोई हानिकारक गैस आ गयी है। इस प्रकार हानिकारक गैस की उपस्थिति की पूर्व सूचना मिल जाती है, जिससे दुर्घटना से बचा  जा सकता है।

गैल्वेनीकरण तथा टिन पर पत्तर चढ़ाना

लोहे की चादरों पर जिंक की परत चढ़ाने को गैल्वेनीकरण कहते हैं\ इस प्रकार प्राप्त चादरों पर जंग नहीं लगता है और उनकी आयु भी बढ़ जाती है। गैल्वेनीकरण करने के लिए पहले लोहे की चादरों को पुर्णतः साफ कर लेते हैं। और फिर पानी से से धोकर द्रावक मिले पिघले हुए जस्ते में डाल देते हैं। जस्ते का पतला स्तर लोहे पर जम जाता है। इस स्तर को एकसमान करने के लिए इन चादरों को गर्म बेलनों में से गुजारा जाता है। इस प्रकार प्राप्त चादरें गैल्वेनीकृत चादरें कहलाती हैं।

टिन का पत्तर चढ़ाना Tinplating

लोहे या इस्पात की चादरों को वायु के प्रभाव से सुरक्षित रखने के लिए टिन की पॉलिश की जाती है। इस विधि में पहले लोहे की चादरों को तनु अम्ल तथा जल से साफ किया जाता है और फिर पिघले हुए टिन में डुबोकर गर्म बेलनों में से होकर गुजारा जाता है, जिससे चादरों पर एक ही मोटाई की परत चढ़ जाती है। टिन की पॉलिश विद्युत् विधि द्वार भी की जाती है। इस विधि में साफ चादरें ऋणोद तथा साफ़ चादरें धनोद का कम करती हैं। SnClका HCL में विलयन विद्युत् अपघट्य (Electrolyte) का काम करता है। विद्युत् धारा प्रवाहित करने से चादरों पर टिन की एक सार परत चढ़ जाती है।

पोर्टलैंड सीमेंट Portland Cement

इमारतों को बनाने के लिए इस सीमेंट का प्रयोग होता है। पोर्टलैंड इंग्लैण्ड में पाए जाने वाले पत्थरों से लिया गया है। इसका प्रयोग सर्वप्रथम 1824 में इंग्लैंड में जोसेफ एस्पडीन (Joseph Aspdin) ने किया था। यह मुख्यतः कैल्सियम एल्यूमिनेट तथा कैल्शियम सिलिकेट का मिश्रण है, जो जल की उपस्थिति में पठार के समान कठोर हो जाता है।

रचना Composition

साधारण सीमेंट की रचना इस प्रकार हो सकती है-

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