संचार/Communication नोट्स

जनसंचार का अर्थ, परिभाषा, कार्य एवं सिद्धांत janasanchaar ka arth, paribhaasha, kaary evan siddhaant

आमतौर पर जनसंचार शब्द का प्रयोग टीवी, रेडियो, समाचार-पत्र, पत्रिका, फिल्म या संगीत रिकार्ड आदि के माध्यम से सूचना, संदेश, कला व मनोरंजन सामग्री के वितरण को दर्शाने के लिए किया जाता है।

अन्तवैयक्तिक, समूह व अन्य आमने-सामने की स्थिति वाले संचार से जनसंचार काफी भिन्न है। इस संचार में एक संदेश को काफी बडी संख्या में आडियंस के पास पहुंचाया जाता है। संदेश प्राप्त करने वाले लोगों की सांस्कृतिक, भौगोलिक, भाषायी दशा इत्यादि में कोई समानता हो भी सकती है और नहीं भी।

अधिसंख्य लोगों के साथ एक ही वक्त में संचार करने की प्रक्रिया को जनसंचार कहते हैं। यह प्रक्रिया संचार के अन्य सभी स्वरूपों से भिन्न है क्योंकि इसमें एक छोटा सा समूह काफी बडे जनसमूह को एक ही समय में एक ही संदेश उपलब्ध करवाता है। संदेश प्राप्त करने वाले लोगों की प्रकृति, मान्यताएं, विचार, मूल्य इत्यादि एक-दूसरे से काफी भिन्न होते हैं। संचार के इस स्वरूप में संदेश प्रेषक और प्रापक के बीच भौतिक व भावनात्मक स्तर पर भी एक-दूसरे से दूर होते हैं। इस प्रक्रिया में संदेश का उत्पादन करने व उसे दूर-दूर तक प्रसारित करने के लिए वैज्ञानिक तकनीकों का सहारा लिया जाता है। जनसंचार एक प्रकार से समय व स्थान के बंधनों से पूरी तरह मुक्त है।

संदेश प्राप्त करने वाले विविध प्रकृति के लोगों को परिभाषित करने के लिए अंग्रेजी के शब्द आडियंस का प्रयोग किया जाता है। माध्यम विशेष के आधार पर इन्हें पाठक, श्रोता, दर्शक इत्यादि की श्रेणी में विभाजित किया जाता है।

जनसंचार में संदेश प्रेषित करने के लिए कई स्रोत उपलब्ध हैं। इन स्रोतों को जनमाध्यम बोला जाता है। आमतौर पर समाचार-पत्र, पत्रिका, पुस्तक, रेडियो, टीवी, फिल्म, संगीत रिकार्ड आदि को जनमाध्यम की श्रेणी में शामिल किया जाता है।

जनसंचार की एक और खासियत यह है कि इसमें संदेश उत्पादक कभी भी अकेला व्यक्ति नहीं हो सकता है। प्रसारण योग्य संदेश का चयन, उसका स्वरूप तैयार करना, संकेतीकरण व प्रसारण की प्रक्रिया को नियंत्रित करने के लिए एक विशेषज्ञों का दल काम करता है। जनमाध्यमों के द्वारा लोगों तक पहुुंचाए जाने वाले संदेश को ‘अन्तर्वस्तु’ कहा जाता है। हमारे जीवन में जनसंचार एक अहम भूमिका निभाता है। पृथ्वी के सभी भागों को आपस में जोडकर इस प्रक्रिया ने ‘वैश्विक गांव’ की परिकल्पना को साकार कर दिया है।

जनसंचार की परिभाषाएं

  1. जब कुछ लोगों का समूह अधिसंख्य अज्ञात व विषमजातीय जनसमूह को कुछ विशिष्ट माध्यमों की सहायता से कोई संदेश प्रेषित करे तो वह प्रक्रिया जनसंचार कहलताती है।
  2. संदेश, जनमाध्यम और श्रोतावृंद जनसंचार के सबसे महत्वपूर्ण तत्व हैं।
  3. जनमाध्यमों की सहायता से अधिसंख्य, विषमजातीय समूहों तक एक ही समय में समान संदेश पहुंचाने की प्रक्रिया जनसंचार है। इसमें लोगों द्वारा मीडिया का प्रयोग व मीडिया के लोगों पर प्रभाव का भी अध्ययन किया जाता है।

जनसंचार के गुणधर्म

हमने देखा कि संचार के अन्य स्वरूपों से जनसंचार किस प्रकार भिन्न है। जनसंचार के भी कुछ अद्वितीय गुणधर्म होते हैं, जिनके बारे में जानना जरूरी है।

विलम्बित प्रतिपुष्टि

अन्त:व्यैक्तिक, अन्तवैयक्तिक व समूह संचार की अपेक्षा जनसंचार में स्रोत व प्रापक के बीच की दूरी बहुत ज्यादा होती है। इसी वजह से आडियंस की प्रतिपुष्टि सीमित व विलम्बित रहती है। कई बार तो यह बहुत कम व नगण्य हो जाती है।

गेटकीपिंग

यह भी जनसंचार का एक अद्वितीय गुणधर्म है। जनसंचार के व्यापक प्रभाव के चलते यह आवश्यकता महसूस की गई कि लगातार प्रसारित होने वाले संदेश के चयन व संपादन पर कुछ नियंत्रण अवश्य होना चाहिए। जनसंचार में सांगठनिक व व्यक्तिगत दोनों ही स्तरों पर गेटकीपिंग की जाती है।

उदाहरण के लिए पत्रकार, संपादकीय दल व लोकपाल अपने-अपने स्तर पर संदेश की सामग्री की जांच पडताल करते हैं। लोकपाल यह पडताल करते हैं कि कहीं कुछ ऐसा तो प्रकाशित नहीं हो रहा है जो कि कानूनी रूप से संकट पैदा कर दे। (भारत के समाचार-पत्रों में तो सिर्फ टाइम्स ऑफ इंडिया में ही लोकपाल कार्यरत है।) सरकार, प्रेस परिषद, एडीटर्स गिल्ड आदि कई संगठन हैं जो कि समाचार-पत्रों की सामग्री पर निगाह रखते हैं। भले ही सांगठनिक हो या फिर व्यक्तिगत, गेटकीपिंग में कुछ ऐसे मानक तैयार करने की चेष्टा की जाती है, जो कि संदेश विकसित करते समय व उसे प्रस्तुत करते समय दिशा-निर्देशक की तरह काम करें।

जनसंचार के कार्य

जनसंचार के तीन मूलभूत काम माने जाते हैं:

  1. लोगों को सूचित करना
  2. लोगों का मनोरंजन करना
  3. उन्हें समझाना या किसी काम के लिए मनाना

साथ ही साथ यह माध्यम लोगों को शिक्षित करने व सभ्यताओं के प्रचार में भी सहायता करते हैं। यहां हम उपर्युक्त तीन कार्यों के बारे में ही बात करेंगे।

सूचित करना

सूचनाओं का प्रसारण समाचार माध्यमों का प्राथमिक कार्य है। समाचार-पत्र, रेडियो और टीवी विश्वभर की खबरें उपलब्ध करवाकर हमारा सूचना स्तर बढाने में सहायता करते हैं। लेकिन पिछले कुछ सालों से समाचार की अवधारणा में फर्क आता जा रहा है। समाचार माध्यम अब किसी घटना को ‘जैसे का तैसा’ बताने का कार्य नहीं करते हैं। समाचारों का वर्णन करने से लेकर इनमें मानवीय अभिरुचि, विश्लेषण और फीचराइजेशन को भी अब शामिल कर लिया गया है।

पत्रकार आज सिर्फ पत्रकार ही नहीं रह गए हैं। वे आज समाचार विश्लेषक बन गए हैं, जो किसी भी महत्वपूर्ण समाचार के आगामी प्रभावों के बारे में चर्चा करते हैं। आजकल समाचार माध्यमों में ‘साफ्ट स्टोरीज’ पर ज्यादा ध्यान केंद्रित किया जा रहा है। समाचार माध्यम आज हमें किसी भी घटना, विचार, नीति, परिवर्तन, दर्शन आदि को समझने में भी सहायता करते हैं।

मनोरंजन करना

जनसंचार का एक अत्यधिक प्रचलित कार्य लोगों का मनोरंजन करना भी है। रेडियो, टीवी और फिल्म तो सामान्यतया मनोरंजन का ही साधन समझे जाते हैं। समाचार-पत्र भी कामिक्स, कार्टून, फीचर, वर्ग पहेली, चक्करघिन्नी, सूडोकू आदि के माध्यम से पाठकों को मनोरंजन की सामग्री उपलब्ध करवाते हैं।

रेडियो आमतौर पर संगीत के माध्यम से लोगों का मनोरंजन करता है। हास्य नाटिका, नाटक, वार्ता इत्यादि के माध्यम से भी रेडियो मनोरंजन उपलब्ध करवाता है।

टीवी तो मनोरंजन का सबसे बडा साधन बन चुका है। गंभीर विषयों जैसे कि समाचार, प्रकृति, वन्य जीवन से जुडे हुए चैनल भी हास्य की सामग्री प्रसारित करते हैं।

सभी जन माध्यमों में से शायद फिल्म ही ऐसा है, जो सिर्फ और सिर्फ मनोरंजन के लिए बना है। वृत चित्र, शैक्षणिक फिल्मों और कला फिल्मों को छोड कर बाकी सभी फिल्में मनोरंजन ही उपलब्ध करवाती हैं।

लोगों को किसी काम के लिए प्रोत्साहित करना

किसी वस्तु, सेवा, विचार, व्यक्ति, स्थान, घटना इत्यादि के प्रति लोगों को समझाने या प्रोत्साहित करने के लिए भी जन माध्यमों को औजार के रूप में इस्तेमाल किया जाता है। अलग-अलग जनमाध्यमों की अलग-अलग प्रकृति व पहुंच होती है (प्रसार, पाठक संख्या, श्रोता संख्या, दर्शक संख्या इत्यादि)।

विज्ञापनदाता और विज्ञापन एजेंसियां इन माध्यमों की प्रकृति को पहचानते हैं। संदेश की प्रकृति और लक्षित समूह को ध्यान में रखकर निर्धारित किया जाता है कि उसे किस माध्यम से प्रसारित किया जाए।

हालांकि संचार शास्त्री किसी भी एक परिभाषा पर सहमत नहीं हो पाए हैं। संचार की बहुप्रचलित परिभाषा के अनुसार ‘संचार वह प्रक्रिया है, जिसमें किसी व्यवस्था के दो या अधिक तत्व किसी वांछित लक्ष्य को प्राप्त करने हेतु अन्योन्यक्रिया करते हैं।’ एक प्रक्रिया के तौर पर यह निरंतर गतिशील, परिवर्तनशील व अंतहीन है। हमने भूतकाल में जो कुछ पढा, सुना और देखा है, वह आज भी कुछ हद तक हमें प्रभावित करता है।

प्रतिदिन हम हजारों संदेश प्राप्त करते हैं। उन पर प्रक्रिया होने के बाद उनका मूल्यांकन होता है। इस मूल्यांकन के आधार पर हम कुछ संदेशों को खारिज कर देते हैं और कुछ को अपने मस्तिष्क में संग्रहित सूचना, विचार, मत इत्यादि के साथ जमा कर लेते हैं। यह सभी सूचनाएं हमें किसी न किसी स्तर पर प्रभावित करती रहती हैं। आज हम संचार के माध्यम से जो कुछ भी सीख रहे हैं, शर्तिया तौर पर भविष्य में हमारे व्यवहार पर कहीं न कहीं उसका असर देखने को मिलेगा।

जनसंचार के सिद्धांत

यहां जनसंचार के कुछ प्रमुख सिद्धांतों के नाम दिए जा रहे हैं –

  1. एजेंडा सैटिंग थ्योरी
  2. कल्टीवेशन थ्योरी
  3. कल्चरल इम्पीरियलिज्म थ्योरी
  4. डिफ्यूजन थ्योरी
  5. फंक्शनल थ्योरी ऑफ मास कम्यूनिकेशन
  6. ह्यूमैन एक्शन एप्रोच थ्योरी
  7. मीडिया डीपेंडेंसी थ्योरी
  8. मीडिया इक्वेशन थ्योरी
  9. रूल बेस्ड थ्योरी
  10. स्पायरल ऑफ साइलेंस थ्योरी
  11. टैक्नोलाजिकल डिटरमिनेशन थ्योरी
  12. यूजेस एंड ग्राटीफिकेशन थ्योरी

हमारे बारें में

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My Name is Jitendra Singh (Rana) और मैं एक सफल शिक्षक बनने की तैयारी कर रहा हूं ! और मैं लखनऊ, उत्तर प्रदेश (भारत) से हूँ।
मेरा उद्देश्य हिन्दी माध्यम में प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले प्रतिभागियों का सहयोग करना है ! आप सभी लोगों का स्नेह प्राप्त करना तथा अपने अर्जित अनुभवों तथा ज्ञान को वितरित करके आप लोगों की सेवा करना ही मेरी उत्कृष्ट अभिलाषा है !!
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