बाल मनोविज्ञान नोट्स शिक्षाशास्त्र नोट्स

सबसे महत्वपूर्ण शिक्षाशास्त्र प्रश्न और उत्तर-2 CTET TET MPTET CGTET DSSSB KVS

  1. ”परामर्श दो व्‍यक्तियों का सम्‍पर्क है जिसमें एक को किसी प्रकार की सहायता दी जाती है।” यह कथन है – मायर्स का
  2. रूथ स्‍ट्रैंग के अनुार, परामर्श का उद्देश्‍य है – आत्‍म परिचय, आत्‍म बोध
  3. डन्‍समूर के अनुसार, परामर्श का उद्देश्‍य है – छात्रों में समस्‍या का समाधान की योग्‍यता प्रदान करना।
  4. रॉबर्ट्स के अनुसार, परामर्श का उद्देश्‍य है – शैक्षिक समस्‍याओं के समाधान में सहायता करना, व्‍यावसायिक समस्‍याओं के समाधान में सहायता करना, व्‍यक्तिगत समस्‍याओं के समाधान में सहायता करना।
  5. रोलां के अनुसार, परामर्श का उद्देश्‍य है – छात्रों में हीन भावना के विकास को रोकना।
  6. हार्डी के अनुसार, परामर्श का उद्देश्‍य है – स्‍व-विकास के लक्ष्‍य प्राप्‍त करने में सहायता करना।
  7. कुप्‍पूस्‍वामी के अनुसार, परामर्श के सिद्धान्‍तों का विभाजन होता है – चार प्रकार से
  8. परामर्श अवधि होनी चाहिए – 30 से 40 मिनट
  9. समायोजन सम्‍बन्‍धी परामर्श को जाना जाता है – नैदानिक परामर्श के नाम से
  10. मनोवैज्ञानिक परामर्श में निहित होता है – संवेगात्‍मक स्थि‍रता व मनोवैज्ञानिक विधियों का प्रयोग
  1. निम्‍नलिखित में कौन सा तथ्‍य धार्मिक परामर्श से सम्‍बन्धित है – नैतिक विकास, आदर्शों का विकास, आध्‍यात्मिक विकास
  2. शिक्षण अधिगम प्रक्रिया से सम्‍बन्धित परामर्श को माना जाता है – शैक्षिक परामर्श
  3. किसी व्‍यवसाय से सम्‍बन्धित परामर्श को माना जाता है – व्‍यावसायिक निर्देशन व व्‍यावसायिक परामर्श
  4. परामर्श को व्‍यक्तिगत रूप में स्‍वीकार करने वाले तथा सामूहिक रूप में अस्‍वीकार करने वाले विद्वान का नाम है – रेन
  5. परामर्श पारस्‍परिक रूप से सीखने की प्रक्रिया है। यह कथन है – बिली का एवं एण्‍ड्रू का
  6. ब्रीवर के अनुसार, परामर्श है – विचार-विमर्श व मित्रतापूर्ण वाद-विवाद
  7. निर्देशात्‍मक परामर्श होता है – परामर्शदाता केन्द्रित
  8. अनिर्देशात्‍मक परामर्श होता है – परामर्श प्रार्थी केन्द्रित
  9. रोजर्स के अनुसार, पूर्ण मनोवैज्ञानिक परामर्श है – अनिर्देशात्‍मक
  10. स्‍वतन्‍त्र वातावरण का अभाव किस प्रकार के परापर्श में होता है – निर्देशात्‍मक परामर्श में
  1. अनिर्देशात्‍मक परामर्श में महत्‍व प्रदान किया जाता है – अधिगम में
  2. निर्देशात्‍मक परामर्श में महत्‍व प्रदान किया जाता है – व्‍यक्ति को
  3. विश्‍लेषण की प्रक्रिया को महत्‍व प्रदान किया जाता है – निर्देशात्‍मक परामर्श में
  4. परामर्शदाता अधिक सक्रिय रहता है – निर्देशात्‍मक परामर्श में
  5. परामर्श प्रार्थी को क्रियाशील रखने के लिए आवश्‍यक होता है – अनिर्देशात्‍मक परामर्श में
  6. अनिर्देशात्‍मक परामर्श को पूर्व नियोजित क्रिया किस विद्वान द्वारा समझा जाता है – जेम्‍स एम. ली. द्वारा
  7. डम्‍बाइल के अनुसार, अवधान का आशय है – किसी एक वस्‍तु पर अन्‍य वस्‍तुओं की अपेक्षा अधिक चेतना केन्द्रित करना।
  8. मैक्‍डूगल के अनुसार, ध्‍यान है – ज्ञान प्रक्रिया को प्रभावित करने वाली इच्‍छा, ज्ञान प्रक्रिया को प्रभावित करने वाला प्रयास
  9. मन के अनुसार, अवधान है – मानसिक क्रिया
  10. वैलेन्‍टाइल के अनुसार, अवधान है – पूर्ण मानसिक क्रिया
  11. स्‍टाउट के अनुसार, पूर्ण ज्ञान का सम्‍बन्‍ध है – पूर्व ज्ञान से
  12. कक्षा शिक्षण में बालक की मुख मुद्रा से पता लगाया जा सकता है – अवधान की दशा का
  13. अवधान की प्रक्रिया में बालक को करना पड़ता है – शारीरिक प्रयास व मा‍नसिक प्रयास
  14. अवधान के मूल में समाहित होता है – प्रयोजन, रुचि, उपयोगिता
  15. अवधान के लिए आवश्‍यक एवं प्रमुख शर्त है – मानसिक सक्रियता
  16. वुडवर्थ के लिए अवधान केन्द्रित करने के लिए प्रमुख आवश्‍यकता है – तत्‍परता
  17. अवधान की प्रक्रिया में बालक तथ्‍यों के साथ किस क्रिया को करता है – संश्‍लेषण एवं विश्‍लेषण
  18. सामान्‍य रूप से व्‍यक्ति अवधान केन्द्रित कर सकता है – एक वस्‍तु पर
  19. निम्‍नलिखित में कौन-सा गुण अवधान से सम्‍बन्धित है – अस्थिरता
  20. एक बालक कहानियों की किताबों पर पूर्ण ध्‍यान केन्द्रित करता है। उसका यह अवधान माना जाएगा – ऐच्छिक अवधान
  21. परीक्षा के समय में व्‍यस्‍त छात्र का ध्‍यान पड़ोस में बजने वाले टेपरिकार्डर की ओर चला जाता है। उसका यह अवधान माना जाएगा – अनैच्छिक अवधान
  22. विद्यार्थी गणित विषय में इसलिए अवधान केन्द्रित करने का प्रयास कर रहा है कि यह उसके माता-पिता की इच्‍छा है। उसका यह अवधान माना जाएगा – अनभिप्रेरित अवधान
  23. एक बालक अपने मित्र को क्रिकेटर बनते हुए देखकर क्रिकेट के प्रत्‍येक कार्यक्रम को ध्‍यानपूर्वक देखता है तथा उस पर अवधान केन्द्रित करता है। उसका यह अवधान माना जाएगा – अर्जित अवधान
  24. मन्दिर में भगवान राम-सीता की विशालमूर्ति को देखकर एक व्‍यक्ति द्वारा उसका संश्‍लेषण एवं विश्‍लेषण किया जाता है। उसका यह अवधान माना जाएगा – मूर्त अवधान
  25. एक शिक्षक नैतिक मूल्‍यों पर ध्‍यान केन्द्रित करने के लिए बालक से कहता है? बालक द्वारा अपना ध्‍यान दया, परोपकार एवं धर्म आदि पर केन्द्रित किया जाता है। उसका यह अवधान होगा – अमूर्त अवधान
  26. ऐच्छिक अवधान का प्रमुख तत्‍व है – व्‍यक्तिगत सुख एवं व्‍यक्तिगत उपयोगिता
  27. अन अभिप्रेरित अवधान में अधिगमकर्ता को करना पड़ता है – स्‍व-इच्‍छाओं का दमन
  28. अर्जित अवधान में अधिगमकर्ता में करना पड़ता है – इच्‍छा एवं रुचि
  29. निम्‍नलिखित में कौन-सा तथ्‍य ऐच्छिक अवधान से सम्‍बन्धित है – उद्दीपन पर के‍न्‍द्रीकरण, अवधान की सक्रियता, आयु के साथ विकास
  30. निम्‍नलिखित में कौन-सा तथ्‍य अनैच्छिक अवधान से सम्‍बन्धित है – बिना इच्‍छा के ध्‍यान केन्‍द्रीकरण, आयु का प्रभाव न होना, प्रयास न करना।
  31. अवधान की दशाओं का विभाजन प्रमुख रूप से किया जा सकता है – दो भागों में
  32. निम्‍नलिखित में अवधान से सम्‍बन्धित तथ्‍य है – आवश्‍यकता
  33. ”रुचि से किया हुआ ध्‍यान और धयान करना ही रुचि है।” यह कथन है – मैक्‍डूगल का
  34. निम्‍नलिखित में कौन-सा तथ्‍य अवधान की आन्‍तरिक दशाओं से सम्‍बन्धित है – समझ, रुचि, आवश्‍यकता
  35. निम्‍नलिखित में कौन-सा तथ्‍य अवधान की बाह्य दशाओं से सम्‍बन्धित है – उद्दीपक की प्रकृति एवं उद्देश्‍य
  36. थार्नडाइक एवं हरबर्ट के अनुसार, अवधानको जाग्रत करने के लिए आवश्‍यक है – पूर्व ज्ञान को जाग्रत करना।
  37. निम्‍नलिखित में से कौन-सा तथ्‍य अवधान को प्रभावित करता है – नवीनता, विषमता, उद्दीपक तीव्रता
  38. निम्‍नलिखित में कौन-सा उद्दीपक अवधान को सम्‍भव बनाता है – तीव्र आवात, तीव्र रंग, तीव्र गंध
  39. अवधान विक्षेप का कारण है – थकान, प्रेरणा का अभाव, भौतिक पर्यावरण
  40. कक्षाशिक्षण में शोरयुक्‍त वातावरण का परिणाम होता है – अवधान विक्षेप, निम्‍न अधिगम
  41. शिक्षक द्वारा प्राथमिक स्‍तर पर व्‍याख्‍यान विधि का प्रयोग अवधान में उत्‍पन्‍न करेगा – बाधा
  42. कक्षा शिक्षण में अवधान केन्द्रित करने के लिए शिक्षक को करना चाहिए – शिक्षण अधिगम सामग्री का प्रयोग, उचित शिक्षण विधियों का प्रयोग
  43. बालकों का अवधान सदैव किस प्रकार की शिक्षण अधिगम में केन्द्रित होता है – रुचिपूर्ण तथा बाल केन्द्रित
  44. पुरस्‍कार के माध्‍यम से बालकों को शिक्षण अधिगम प्रक्रिया में अवधान केन्द्रित करने के लिए प्रेरित करना माना जाता है – सकारात्‍मक साधन
  45. अवधान रुचि सम्‍बन्धित है – घनिष्‍ठ रूप से
  46. कक्षाशिक्षण में अवधान केन्द्रित में शिक्षक की भूमिका होनी चाहिए – सहयोगी की तरह
  47. कक्षा शिक्षण में अवधान के लिए आवश्‍यक है – उचित शिक्षण विधियां, कक्षा का उचित वातावरण, प्रभावशाली शिक्षण अधिगम प्रक्रिया
  48. रुचि शब्‍द की उत्‍पत्ति किस भाषा के शब्‍द से हुई है – लैटिन
  49. INTERESSE शब्‍द किस भाषा का शब्‍द है – लैटिन
  50. INTERESSE शब्‍द का अर्थ है – अन्‍तर स्‍थापित करना तथा लगाव होना
  51. बी. एन. झा. के अनुसार, रुचि है – मानसिक विधि, ध्‍यान क्रिया को सतत् बनाने वाली
  52. क्रो एण्‍ड क्रो के अनुसार, रुचि है – अनुप्रेरक शक्ति
  53. रुचि होती है – जन्‍मजात व अर्जित
  54. रुचियां होती है – परिवर्तनशील तथा अपरिवर्तनशील
  55. रुचियों का विकास होता है – व्‍यक्तित्‍व पर्यावरण की अन्‍त:क्रिया के कारण
  56. रुचियां प्रभावित होती है – सामाजिक स्थिति से तथा आर्थिक स्थिति से
  57. रुचियों के निर्धारण में प्रमुख रूप से भूमिका होती है – प्रेरकों की
  58. रुचियां पर प्रमुख रूप से प्रभाव होता है – लिंग का, सामाजिक स्थिति का, आर्थिक स्थिति का
  59. मां अपनी सन्‍तान के प्रति रुचि रखती है। इस रुचि को माना जाएगा – जन्‍मजात
  60. कला, विज्ञान एवं राजनीति में रुचि को माना जाता है – अर्जित
  61. शिक्षण अधिगम प्रक्रिया में छात्रों की रुचि विभाजिक करने के लिए शिक्षकों को ध्‍यान देना चाहिए – छात्र की मनोदशा, छात्र का स्‍वास्‍थ्‍य, छात्र की आवश्‍यकताएं
  62. छात्रों की प्रकरण में रुचि विकसित करने के लिए शिक्षक द्वारा स्‍पष्‍ट करना चाहिए – प्रकरण का उद्देश्‍य, उपयोगिता, भविष्‍य में आवश्‍यकताएं
  63. एक बालक का जन्‍म गरीब परिवार में होने के कारण शिक्षा के प्रति उसकी रुचि विकसित न होने का कारण होगा – अभिभावक की आर्थिक दशा, अभिभावक की अशिक्षा
  64. बालक की किसी विषय या क्रिया में रुचि होने के लिए आवश्‍यक होता है – आनन्‍द
  65. विद्यालय में रुचिपूर्ण वातावरण उत्‍पन्‍न करने में बाधा उपस्थित करते हैं – कठोर अनुशासन
  66. अभिभावकों का आक्रामक व्‍यवहार बालक की रुचि पर प्रभाव डालता है – रुचि को निम्‍न करना, विपरीत प्रभाव डालना।
  67. रुचियों का विकास होता है – जीवन पर्यन्‍त
  68. रुचि तालिका का निर्माण कार्य किस संस्‍था ने प्रारम्‍भ किया – कारनेज इन्‍स्‍टीट्यूट ऑफ टेक्‍नोलॉजी ने
  69. रुचि तालिका निर्माण की प्रक्रिया प्रारम्‍भ हुई – सन् 1919 में
  70. स्‍ट्रांग की व्‍यावसायिक रुचि परिसूची में पदों की संख्‍या है – 420
  71. स्‍ट्रांग की व्‍यावसायिक रुचि परिसूची में प्रतिरूपों की संख्‍या है – चार
  72. स्‍ट्रांग की व्‍यावसायिक रुचि परिसूची में A प्रतिरूप है – पुरुषों के लिए
  73. स्‍ट्रांग की व्‍यावसायिक रुचि परिसूचीमें बालिकाओं के लिए प्रतिरूप है – प्रतिरूप डब्‍ल्‍यू. बी.
  74. स्‍ट्रांग की व्‍यावसायिक रुचि परिसूची में बालकों के लिए प्रतिरूप है – प्रतिरूप ए
  75. रुचि गुप्‍त अवधान है एवं अवधान सक्रिय रुचि है। यह कथन है – मैक्‍डूगल का
  76. रुचि वह स्थिर मानसिक विधि है जो ध्‍यान क्रिया को सतत बनाती है। यह कथन है – बी.एन.झा का
  77. कूडर अधिमान लेख में पदों की संख्‍या है – 168
  78. कूडर अधिमान का रुचि मापन क्षेत्र है – सीमित
  79. कूडर अधिमान लेखा में रुचि मानदण्‍डों की संख्‍या है – 10
  80. थर्स्‍टन सूची में व्‍यावसायिक युग्‍मों की संख्या है – 100
  81. थर्स्‍टन रुचि अनुसूची के प्रशासन में समय लगता है – 10 मिनट
  82. क्‍लीटन की रुचि तालिका में कितने प्रतिरूप है – 3
  83. क्‍लीटन की व्‍यावसायिक रुचि तालिकामें पदों की संख्‍या है – 630
  84. ली थॉप की रुचि तालिका कितने क्षेत्रों में पर आधारित है – 6
  85. हेपनर की व्‍यावसायिक रुचि सूची में उपलब्‍ध पद है – 167
  86. एस. पी. कुलश्रेष्‍ठ व्‍यावसायिक एवं शैक्षिक प्रपत्र में शैक्षिक क्षेत्रों की संख्‍या है – 7
  87. एस. पी. कुलश्रेष्‍ठ की रुचि तालिका का सम्‍बन्‍ध है – व्‍यवसाय से, शैक्षिक क्षेत्र से
  88. स्‍टीवार्ड एण्‍ड ब्रेनार्ड की विशिष्‍ट रुचि तालिका में प्रतिरूपों की संख्‍या है – 7
  89. मूल्‍यांकन एक प्रक्रिया है – व्‍यापक
  90. किसी वस्‍तु का निर्धारण ही मूल्‍यांकन है। यह कथन है – टारगर्सन का व एडम्‍स का
  91. क्विलिन एवं हनन के अनुसार, मूल्‍यांकन है – शिक्षालय द्वारा छात्रों में किए गए परिवर्तनों का प्रमाणीकरण एवं व्‍यवस्‍था
  92. ली के अनुसार, मूल्‍यांकन है – शैक्षिक लक्ष्‍यों की प्राप्ति की प्रगति की जांच करना

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एग्जाम टॉपर क्लास टीम

My Name is Jitendra Singh (Rana) और मैं एक सफल शिक्षक बनने की तैयारी कर रहा हूं ! और मैं लखनऊ, उत्तर प्रदेश (भारत) से हूँ।
मेरा उद्देश्य हिन्दी माध्यम में प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले प्रतिभागियों का सहयोग करना है ! आप सभी लोगों का स्नेह प्राप्त करना तथा अपने अर्जित अनुभवों तथा ज्ञान को वितरित करके आप लोगों की सेवा करना ही मेरी उत्कृष्ट अभिलाषा है !!
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