प्राचीन भारत का इतिहास नोट्स

मौर्योत्तर काल Post-Mauryan Period

मौर्य साम्राज्य का प्रखर सूर्य भारत के राजनैतिक गगन पर एक शताब्दी तक अपने पूर्ण प्रकाश के साथ चमकता रहा, परन्तु उसके उपरान्त उसे अस्ताचल की ओर गमन करना पड़ा। मौर्य साम्राज्य के पतन के बाद भारत की राजनैतिक एकता नष्ट होने लगी। साम्राज्य के प्रान्त एक-एक कर स्वतंत्र होने लगे।

गान्धार और उसके निकटवर्ती प्रान्तों ने अपनी स्वतंत्र संज्ञा स्थापित करने के लिए कमर कस ली। बैक्ट्रिया निवासी यूनानियों ने भारत की इस राजनैतिक स्थिति का लाभ उठाया। उन्होंने उत्तर-पश्चिम भारत के कई प्रदेशों पर अधिकार जमा लिया।

सीरिया के शासक एन्टी आोकस ने उस दिशा में पहले ही पहल कर रखी थी। उसी के पद-चिह्नों का अनुगमन करते हुए उसके दामाद डेमोट्रिय ने पंजाब और सिंध पर अधिकार कर लिया। विदेशी आक्रमणों की यह प्रक्रिया लम्बे समय तक चलती रही।

इधर कलिंग ने भी अपना स्वतंत्र अस्तित्व बना लिया। दक्षिण में आन्ध्रों ने अपना शक्तिशाली राज्य स्थापित कर लिया। इसी परिवेश में उत्तर भारत में एक नए राजवंश का उदय हुआ। यह राजवंश शुंग राजवंश के नाम से विश्रुत है। आगे के लेखों में इन्हीं शुगों तथा उनके बाद क्रमशः कण्व, कुषाण तथा सातवाहन राज्यों के मुख्य पहलुओं को रेखांकित करने का प्रयास करेंगे।

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