दर्शनशास्त्र नोट्स/ सामान्य अध्ययन शिक्षाशास्त्र नोट्स

शिक्षाशास्त्र (एजुकेशन) यथार्थवाद Realism

यथार्थवाद Realism

  1. यथार्थवाद के लिए अंग्रेजी का शब्द ‘Realism’ है। ‘रियल’ शब्द ग्रीक भाषा के रीस शब्द से बना है जिसका अर्थ है वस्तु।
  2. यही कारण है “रियलिज्म’ (यथार्थवाद) वस्तु के अस्तित्व से सम्बन्धित यह एक दृष्टिकोण है जिसके अनुसार संसार की प्रत्येक वस्तु सत्य है और प्रत्यक्ष है। प्रत्यक्ष का अनुभव हमें इन्द्रियों से होता
  3. वास्तव में यथार्थवाद एक भौतिकवादी दर्शन है। वस्तु को वास्तविक अथवा यथार्थ मानने के कारण ही इस विचारधारा कों वस्तुवाद अथवा यथार्थवाद की संज्ञा दी जाती है।
  4. यथार्थवादियों के अनुसार बच्चों की शिक्षा उनकी व्यक्तिगत और सामाजिक जरूरतों के अनुसार होनी चाहिए। ताकि वह बड़ा होकर वह सुखी जीवन व्यतीत कर सके। जीवन के साथ अच्छा सामंजस्य स्थापित कर सके।
  5. आज के दौर में कंप्यूटर और अंग्रेजी भाषा की अच्छी समझ को रोज़गार की संभावनाओं के साथ जोड़कर देखा जाता है तो इसका समावेश शिक्षा में करना यथार्थवाद का ही एक उदाहरण है।
  6. जे एस रॉस के अनुसार, “यथार्थवाद यह मानता है कि जो कुछ हम प्रत्यक्ष में अनुभव करते हैं, उसके पीछे तथा उससे मिलता-जुलता वस्तुओं का एक यथार्थ जगत है।”
  7. यथार्थवाद के अनुसार हमारा अस्तित्व स्वतंत्र ना होकर वाह्य पदार्थों के प्रति प्रतिक्रिया का निर्धारण करता है अनुभव वाह्य जगत् से प्रभावित है और वह जगत की वास्तविक सत्ता है।
  8. यथार्थवाद के अनुसार मनुष्य को वातावरण का ज्ञान होना चाहिए और पता होना चाहिए कि वह वातावरण को परिवर्तित कर सकता है या नहीं और इसी ज्ञान के अनुसार उसे कार्य भी करना चाहिए।

यथार्थवाद के दार्शनिक आधार
1. तत्व दर्शन में यथार्थवाद – यर्थाथवाद यह मानते हैं कि ब्रह्माण्ड गतिशील पदार्थ का बना है? हम अपने अनुभवों के आधार पर जगत के नियमित क्रियाकलापों को पहचान सकते हैं। पदार्थ गतिशील हैं और वह अस्तित्व में हैं इसलिए सत्य है।
2. ज्ञान शास्त्र मे यथार्थवाद वास्तविक जगत का अस्तित्व है, हम वास्तविक वस्तु को जानते हैं क्योंकि इसका अस्तित्व है। हम यह कह सकते हैं कि वस्तु का वास्तविक जगत में अस्तित्व है तो वह सत्य है। कोई भी कथन विश्लेषण के पश्चात ही स्वीकार्य है। ज्ञान का अस्तित्व मस्तिष्क ही स्वीकार करता है।
3. मूल्य मीमांसा मे यथार्थवाद –यथार्थवादी प्राकृतिक नियमों मे विश्वास करते हैं उनका कहना है कि मनुष्य इन नियमों का पालन करके सदजीवन व्यतीत कर सकता है। प्रकृति सौन्दर्य से परिपूर्ण है। सौन्दर्य पूर्ण कला-कार्य, ब्रह्माड या प्रकॅति की व्यवस्था तथा तर्क की प्रतिछाया है।
यथार्थवाद के सिद्धान्त
यथार्थवाद प्रत्यक्ष जगत में ही विश्वास करते हैं उनके अनुसार अस्तित्व प्रत्यक्ष में हैं। उनके कुछ निश्चित सिद्धान्त निम्नलिखित हैं
दृश्य जगत ही सत्य
यथार्थवादी यह मानते है कि जो कुछ हम देखते सुनते व अनुभव करते हैं वही सत्य है। प्रत्यक्ष ही सत्य है। इस जगत की सेत्यता विचारों के कारण नहीं है अस्तित्व स्वयं में हैं।
वस्तु जगत की निरन्तरता – यथार्थवादी वस्तु जगत मे नियमितता को स्वीकार करते हैं। वे मन को भी यांत्रिक ढंग से क्रियाशील मानते हैं। यथार्थवादियों का विचार है कि अनुभव और ज्ञान के लिए नियमिता का होना आवश्यक है।
यथार्थवाद पारलौकिकता को अस्वीकार करता है – यथार्थवाद प्रत्यक्ष को ही मानता है क्योंकि उसका अस्तित्व है और यह वैज्ञानिक दृष्टिकोण का आधार है।
इन्द्रियाँ अनुभव व ज्ञान का आधार – सच्चे ज्ञान की प्राप्ति हमारी बाह्य इन्द्रियां सहायक होती हैं क्योंकि यह हमें अनुभव प्रदान कर पूर्ण एवं वास्तविक ज्ञान लेने का आधार बनाती
यथार्थवाद के सम्प्रदाय
1. मानववादी यथार्थवाद – इसे एतिहासिक यथार्थवाद कहा गया। इस युग में मनुष्य को सर्वोच्च स्थान प्रदान किया गया। इस दर्शन में मख्य रूप जीवन एवं प्रकृति को महत्व दिया और प्राचीन साहित्य अॅध्ययन को महत्व दियाँ।
इस विचारधारा को मानने वाले इरैसमस, एवं मिल्टन थे।
2. समाजिकतावादी यथार्थवाद – बालक में सामाजिक कुशलता को उत्पत्ति को शिक्षा का प्रमुख उद्देश्य माना एवं व्यवहारिक अनुभव आधारित शिक्षा पर बल दिया।
इस विचारधारा को मानने वाले लार्ड मोटेन एवं जॉन लॉक प्रमुख विचारक थे।
3. ज्ञानेन्द्रिय यथार्थवाद – इस विचारधारा का सबसे अधिक प्रभाव शिक्षा पर पड़ा। इसके दृष्टिकोण में प्रकृतिवाद एवं प्रयोज्यवाद के सभी अनुभववादी सिद्धान्तों की झलक मिलती है।
यथार्थवाद एवं पाठ्यक्रम
यथार्थवाद का पाठ्यक्रम जीवन की यथार्थ परिस्थितियों आवश्यकताएं तथा समस्याओं को ध्यान में रखते हए बनाया गया जिस में विज्ञान और व्यवसाय संबंधी विषयों को प्रमुख स्थान दिया गया।
यथार्थवाद एवं शिक्षण विधियां

  1. यथार्थवादी शिक्षण विधियों के स्थान पर वस्तुनिष्ठता पर अधिक बल दिया है। यथार्थ वादियों के अनुसार शिक्षण विधियां निम्नलिखित होनी चाहिए
  2. आगमन विधि
  3. भमण विधि
  4. निरीक्षण या प्रयोग विधि

यथार्थवाद एवं विद्यालय
यथार्थवादी विद्यालय की उपयोगिता को समझते हैं और वे विद्यालय को ऐसा स्थान मानते हैं जहां बालक की आवश्यकता एवं शक्ति की अनुकूल शिक्षा व्यवस्था की जा सकती है
यथार्थवादी शिक्षा की विशेषताएं

  1. विज्ञान पर आधारित
  2. बालक की नियन्त्रित स्वतंत्र
  3. ज्ञानेन्द्रियों के प्रशिक्षण पर जोर
  4. रटने वाले तरीके और पुस्तकीय ज्ञान का विरोध
  5. बच्चे के वर्तमान जीवन को महत्व देना
  6. वैयक्तिक और सामाजिक विकास को बराबर महत्व
  7. प्रयोगधर्मिता और व्यावहारिक जीवन को महत्व देना

हमारे बारें में

एग्जाम टॉपर क्लास टीम

My Name is Jitendra Singh (Rana) और मैं एक सफल शिक्षक बनने की तैयारी कर रहा हूं ! और मैं लखनऊ, उत्तर प्रदेश (भारत) से हूँ।
मेरा उद्देश्य हिन्दी माध्यम में प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले प्रतिभागियों का सहयोग करना है ! आप सभी लोगों का स्नेह प्राप्त करना तथा अपने अर्जित अनुभवों तथा ज्ञान को वितरित करके आप लोगों की सेवा करना ही मेरी उत्कृष्ट अभिलाषा है !!
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