भौतिक विज्ञान नोट्स

सौरमंडलीय पिण्ड Solar System Bodies

सौरमंडलीय पिण्डों की तीन श्रेणियां Three Categories of Solar System Bodies

अंतरिक्ष संबंधी नामकरण के लिए एकमात्र अधिकृत संस्था अन्तर्राष्ट्रीय खगोलशास्त्रीय संघ (International Astronomical Union—IAU, स्थापना वर्ष–1919 ई०) के प्राग सम्मेलन (2006 ई०) में सौर मंडल में मौजूद पिण्डों को तीन श्रेणियों में विभाजित किया गया है। ये हैं-

1. परम्परागत ग्रहबुध, शुक्र, पृथ्वी, मंगल, बृहस्पति, शनि, अरुण व वरुण
2. बौने ग्रह या प्लूटोन्सप्लूटो, चेरॉन, सेरेस व जेना (2003 यू०बी० 313)
3. लघु सौर मंडल पिण्डक्षुद्रग्रह, धूमकेतु या पुच्छल तारा, उल्का, उपग्रह व अन्य छोटे खगोलीय पिण्ड

परम्परागत ग्रह Classical Planets

अंतर्राष्ट्रीय खगोलशास्त्रीय संघ (LAU) के नवीनतम परिभाषा के अनुसार ग्रह वे खगोलीय पिण्ड हैं जो निम्नलिखित तीन शर्तों को पूरा करते हैं –

1. सूर्य की परिक्रमा करते हों,

2. उनका द्रव्यमान कम-से-कम इतना हो कि अपने गुरुत्वाकर्षण के कारण उसका आकार लगभग गोल हो गया हो तथा

3. वह अपने पड़ोसी पिण्डों की कक्षा की नहीं लांघता हो।

उपर्युक्त परिभाषा के आधार पर आधुनिक खगोलविदों ने प्लूटो (यम) की ग्रह के रूप में चली आ रही मान्यता को समाप्त कर दिया है, जिससे ग्रहों की संख्या 9 से घटकर 8 हो गई है। प्लूटो को अब बौने ग्रह (Dwarf Planets) की श्रेणी में रखा गया है।

प्राग सम्मलेन

सौरमंडल में ग्रहों की नवीन परिभाषा देने के लिए 15-24 अगस्त, 2006 को चेक गणराज्य की राजधानी प्राग में एक सम्मेलन आयोजित किया गया, जिसे प्राग सम्मेलन (Prague Summit) कहा गया। इस सम्मेलन में कुल 75 देशों के 2500 से अधिक खगोलविदों ने भाग लिया । सम्मेलन में प्लूटो को खगोलविदों ने ग्रहों की बिरादरी से बेदखल कर दिया जिससे ग्रहों की संख्या 9 से घटकर 8 रह गई । प्लूटो को तीन अन्य खगोलीय पिण्डों चेरॉन (Cheron), सेरस (Ceres) तथा जेना 2003 यू बी 313 (Xena-2003 UB 313) के साथ बौने ग्रह की श्रेणी में रखा गया है। यह सम्मेलन 10 दिन तक चला। अमेरिकी अंतरिक्ष शोध एजेंसी (NASA) ने प्राग सम्मेलन के घोषणा को अपमानजनक बताते हुए इसका विरोध किया है।

ग्रह के लिए प्रयुक्त होनेवाला अंग्रेजी शब्द Planet ग्रीक शब्द Planetes से बना है। Planetes का अर्थ है घुमक्कड़ या यायावर (vvanderer)। अतः Planet शब्द मुख्यतः ग्रहों की सतत् गतिशीलता का परिचायक है। आकाश में सभी ग्रह अपनी स्थिति बदलते रहते हैं, जिसके कारण ये आकाश में बहुत कम दिखाई पड़ते हैं और कभी-कभी गायब भी हो जाते हैं। इसलिए इनको प्लेनेट कहा जाता है। अब तक ज्ञात ग्रहों का नामकरण रोम के देवताओं के नाम के आधार पर किया गया है जैसे मरक्यूरी, वीनस, मार्स, जुपिटर, सैटर्न, यूरेनस एवं नेप्च्यून।

ग्रहों का अपना प्रकाश नहीं होता है तथा ये सूर्य के प्रकाश से प्रकाशित होते हैं।

परम्परागत ग्रहों में छः ग्रहों- बुध (Mercury), शुक्र (venus), पृथ्वी (Earth), मंगल (Mars), वृहस्पति (Jupiter) व शनि (saturn)- के बारे में जानकारी प्राचीन काल से ही थी। दो अन्य ग्रहो – अरुण (Uranus) व वरुण (Neptune) की खोज दूरबीन (Telescope) के आविष्कार के पश्चात् हुई। अरुण की खोज 1781 ई० में विलियम हर्शल (William Herschel) ने की तथा वरुण की खोज 1846 ई० में जॉन गैले (John Galle) ने की।

ग्रहों का क्रम Order of Planets:

1. सूर्य से दूरी के अनुसार:बुध (Mercury), शुक्र (venus), पृथ्वी (Earth), मंगल (Mars), बृहस्पति (Jupiter), शनि (saturn), अरुण (Uranus) व वरुण (Neptune)।
2. पृथ्वी से दूरी के अनुसारशुक्र, मंगल, बुध, बृहस्पति, शनि, अरुण व वरुण
3. आकार के अनुसार:बृहस्पति, शनि, अरुण, वरुण, पृथ्वी, शुक्र, मंगल व बुध

परम्परागत ग्रहों का परिचय

बुध Mercury

यह सूर्य का निकटतम ग्रह है। इसकी सूर्य से औसत दूरी 5 करोड़ 80 लाख किमी० है। यह सौर मंडल का सबसे छोटा ग्रह भी है (प्लूटो की ग्रह के रूप में मान्यता समाप्त होने के बाद)। यह आकार में पृथ्वी के उपग्रह चन्द्रमा से थोड़ा बड़ा है। इसका व्यास लगभग 4,900 किमी० है। यह 88 दिन में सूर्य की परिक्रमा कर लेता है। यह अपने दीर्घवृतीय कक्ष में 1,76,000 किमी० प्रति घंटे की गति से घूमता है। यह गति इसे सूर्य की गुरुत्वाकर्षण शक्ति की पकड़ से सुरक्षित रखती है। इसे अपनी धुरी पर एक चक्कर लगाने में 59 दिन लगता है। इसका द्रव्यमान पृथ्वी के द्रव्यमान का 0.056 गुना है। इसका घनत्व 5.6 ग्राम प्रति घन सेमी० है। बुध का अधिक घनत्व यह सिद्ध करता है कि इसकी सतह भारी तत्वों से बनी है। इसका क्रोड लोहे से बना हुआ है। इसका गुरुत्वाकर्षण पृथ्वी का 3/8 वाँ भाग है।

बुध ग्रह पर वायुमंडल नहीं है। यहाँ दिन अतिशय गर्म और रातें बफीली होती हैं। बुध का एक पूरा दिन पृथ्वी के 176 दिनों के बराबर अवधि का होता है (बुध का सिर्फ दिन पृथ्वी के 90 दिनों के बराबर अवधि का तथा इतने ही अवधि की सिर्फ रात होती है)। बुध चन्द्रमा के सदृश दिखायी देता है तथा यहाँ पर भी चन्द्रमा की तरह बड़े-बड़े पहाड़ व ज्वालामुखी के मुँह है। यहाँ पर एक कैलोरिस बेसिन (Caloris Basin) है। इस बेसिन का व्यास 1,300 किमी० है तथा यह सतह से 2,000 मीटर ऊँचे पर्वतों से चारों ओर से घिरी हुई है। बुध ग्रह का कोई उपग्रह नहीं है।

शुक्र Venus

बुध के बाद यह सूर्य का निकटतम ग्रह है। इसकी सूर्य से औसत दूरी 10 करोड़ 82 लाख किमी० है। यह आकार और भार में पृथ्वी के लगभग बराबर है। इसलिए इसे पृथ्वी की बहिन (Earth’s sister) तथा पृथ्वी का जुड़वां (Earth’s Twin) भी कहा जाता है। इसे अपनी धुरी पर एक चक्कर लगाने में 243 दिन लगता है।

यह अरुण (Uranus) की भाँति पृथ्वी की विपरीत दिशा में अर्थात् पूर्व से पश्चिम दिशा में घूर्णन करता है। इसका द्रव्यमान पृथ्वी के द्रव्यमान का 0.815 गुना है। इसका घनत्व 5.2 ग्राम प्रति घन सेमी० है। शुक्र ग्रह गर्म और तपता हुआ ग्रह है। यह सूर्य और चन्द्रमा को छोड़कर सबसे चमकीला दिखायी देता है। इसके चारों ओर सल्फ्यूरिक एसिड के जमे हुए बादल हैं, जो शुक्र के धरातल से 80 किमी० ऊँचाई पर हरदम छाये रहते हैं। ये बादल शुक्र पर पड़नेवाली सूर्य की अधिकांश किरणों (76% किरणों) को परावर्तित कर देते हैं। शुक्र ग्रह का अधिकतर भाग घुमावदार मैदानों से ढंका है तथा इस ग्रह पर कुछ जीवित ज्वालामुखी भी हैं।

शुक्र ग्रह का वायुमंडल लगभग 97% कार्बन डाईऑक्साइड से भरा हुआ है तथा शेष नाइट्रोजन, जलवाष्प तथा अन्य तत्व से। शुक्र का वायुमंडलीय दाब पृथ्वी के वायुमंडलीय दाब से 90 गुना ज्यादा है।

प्रातः पूर्वी आकाश में एवं सायं पश्चिमी आकाश में दिखायी पड़ने के कारण इसे क्रमशः भोर का तारा (Morning Star) तथा सांझ का तारा (Evening star) भी कहते हैं।

बुध ग्रह की भाँति शुक्र ग्रह का भी कोई उपग्रह नहीं है।

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