भूगोल नोट्स

वायुमंडल की संरचना vaayumandal kee sanrachana

वायुमंडल में वायु की अनेक परतें हैं, जो घनत्व और तापमान की दृष्टि से एक-दूसरे से बिल्कुल भिन्न हैं। सामान्यत: यह धरातल से लगभग 1600 कि.मी. की ऊँचा तक फैला है। वायुमंडल के कुल भार की मात्रा का 97 प्रतिशत भाग लगभग 30 कि.मीकी ऊँचा तक विस्तृत है। तापमान और घनत्व की भिन्नता के आधार पर वायुमंडल को पॉंच परतों में बाँटा गया है-

  1.  क्षोभमंडल
  2.  समताप मंडल
  3.  मध्य मंडल
  4.  आयन मंडल
  5.  बाह्य मंडल

क्षोभमंडल

वायुमंडल के सबसे नीचे वाले स्तर को क्षोभमंडल कहते हैं। यह परत भूमध्य रेखा पर 18 कि.मी. तथा धु्रवों पर 8 कि.मी. की ऊँचा तक फैली है। भूमध्य रेखा के ऊपर क्षोभमंडल की मोटा अथवा ऊँचा सर्वाधिक होने का कारण संवहनीय धाराओं द्वारा धरातल की उष्मा को अधिक ऊँचा तक ले जाना है। इस परत की ऊँचा बढने के साथ- साथ तापमान में कमी होती जाती है। तापमान 165 मीटर की ऊँचा पर औसत 1 अंश सेल्यिस के हिसाब से घटता जाता है। इसे ‘सामान्य ताप ह्रास दर’ कहते हैं। इस मंडल (परत) में धूल के कणों तथा जलवाष्प की मात्रा अधिक होने के कारण इस परत में सभी प्रकार के मौसमी परिवर्तन होते रहते है। इन परिवर्तनों के कारण पृथ्वी पर जीव-जन्तुओं की उत्पत्ति एवं विकास होता है। इस परत में वायु कभी शांत नहीं रहती। इसीलिए इस मंडल को क्षोभमंडल या परिवर्तन मंडल भी कहते हैं। वायुयान चालक इस स्तर में हवा के उच्छंखल झोकों के कारण वायुयान उड़ाना पसंद नहीं करते।

समताप मंडल

क्षोभमंडल के ऊपर समताप मंडल स्थित है। क्षोम मंडल और समताप मंडल के बीच एक पतली परत है। जो दोनों मंडल को अलग करती है जिसे क्षोभसीमा कहते हैं। यह एक संक्रमण क्षेत्र है जिसमें क्षोभमंडल और समताप मंडल की मिली-जुली विशेषताएॅं पायी जाती हैं। समताप मंडल की धरातल से ऊँचा लगभग 50 किमी. है। इस परत के निचले भाग में 20 किमी. की ऊँचा तक तापमान लगभग समान रहता है। इसके ऊपर 50 किमी. ऊँचा तक तापमान क्रमश: बढ़ता है। इस परत के ऊपरी भाग में ओजोन परत होने के कारण ही तापमान बढ़ता है। इसमें वायु की गति क्षैतिज होती है। इसी कारण यह परत वायुयानों की उड़ानों के लिए आदर्श मानी जाती है।

मध्य मंडल

समताप मंडल के ऊपर वायुमंडल की तीसरी परत होती है, जिसे मध्य मंडल कहते हैं। धरातल से इसकी ऊँचा 80 किमी. तक है। इसकी मोटा 30 किमी. है। इस मंडल में ऊँचा के साथ तापमान फिर से गिरने लगता है और 80 किमी. की ऊँचा पर 00 से -100 डिग्री सेल्सियस तक हो जाता है।

आयन मंडल

यह वायुमंडल की चौथी परत है। यह 80 किमी. से 400 किमी. की ऊँचाइ के बीच स्थित है। इस मंडल में तापमान ऊँचा के साथ पुन: बढ़ता जाता है। यहॉं की हवा विद्युत आवेशित होती है। पृथ्वी से भेजी गयी रेडयो तरंगे इसी मंडल से परावर्तित होकर पुन: पृथ्वी पर वापस लौट आती हैं, जिससे रेडियो प्रसारण संभव होता है।

बाह्य मंडल

वायुमंडल का सबसे ऊँची परत बाह्य मंडल कहा जाता है। इस मंडल की हवा अधिक विरल होती है।

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